अन्तर्राष्ट्रीय

भारत-जापान की बढ़ती रणनीतिक ताकत से चीन बेचैन! बोला- किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होना चाहिए सहयोग

नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच आयोजित 16वां वार्षिक शिखर सम्मेलन कई अहम रणनीतिक फैसलों और समझौतों के साथ संपन्न हो गया। विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नई उपलब्धि बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस शिखर वार्ता ने साझा विकास, आर्थिक सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को लेकर दोनों देशों की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। साथ ही अगले वर्ष भारत और जापान अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने का संयुक्त रूप से जश्न मनाएंगे।

तीन दिवसीय दौरे के बाद लौटीं जापान की प्रधानमंत्री

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची तीन दिवसीय भारत यात्रा पूरी करने के बाद शुक्रवार को स्वदेश लौट गईं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि यह दौरा भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हुआ। उन्होंने बताया कि 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाई और साझा हितों से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

जायसवाल ने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र समेत वैश्विक स्तर पर शांति, समृद्धि और स्थिरता को मजबूती देने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में जापानी प्रधानमंत्री को औपचारिक विदाई दी।

75 साल पूरे होने पर होंगे विशेष कार्यक्रम

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री के बीच हुई वार्ता में अगले वर्ष दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस ऐतिहासिक अवसर को द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

रक्षा और आपूर्ति शृंखला सहयोग पर चीन की प्रतिक्रिया

भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने संबंधी समझौतों के बाद चीन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि किसी भी दो देशों के बीच होने वाला सहयोग किसी तीसरे देश को निशाना बनाने या उसके हितों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को छोटे-छोटे गुट बनाने, विभाजन पैदा करने या टकराव बढ़ाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। गुओ ने यह भी कहा कि वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और सभी पक्षों को खुलेपन, सहयोग तथा रचनात्मक भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए।

रणनीतिक साझेदारी पर टिकी दुनिया की नजर

भारत और जापान के बीच रक्षा, आर्थिक सहयोग, आपूर्ति शृंखला और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक समन्वय लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में चीन की प्रतिक्रिया को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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