CJP प्रदर्शन के दौरान AI डीपफेक और फर्जी कंटेंट फैलाने का दावा, महाराष्ट्र साइबर ने 429 पोस्ट और हैंडल किए चिन्हित

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र साइबर ने दावा किया है कि इस मामले की निगरानी के लिए उन्नत तकनीकी साधनों की मदद से विशेष अभियान चलाया गया। जांच के दौरान ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, मेटाडेटा, सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार डीपफेक सामग्री का फॉरेंसिक विश्लेषण किया गया।
जांच में संदिग्ध सोशल मीडिया नेटवर्क की पहचान
महाराष्ट्र साइबर के अनुसार तकनीकी जांच में ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के नेटवर्क की पहचान हुई, जो फर्जी, भ्रामक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री प्रसारित कर रहे थे। एजेंसी का दावा है कि इनका उद्देश्य लोगों की राय को प्रभावित करना, भ्रम की स्थिति पैदा करना, अशांति फैलाना और कानून-व्यवस्था पर असर डालना था।
विदेश से संचालित अकाउंट्स की भूमिका आने का दावा
तकनीकी जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि इस तरह की गतिविधियों में भारत के बाहर सक्रिय कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल थे। महाराष्ट्र साइबर के मुताबिक, पाकिस्तान और मध्य पूर्व के कुछ देशों से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका सामने आई है। ये अकाउंट्स भारतीय उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाकर भ्रामक नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे थे। एजेंसी ने संबंधित अकाउंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
429 पोस्ट और हैंडल पर कार्रवाई की प्रक्रिया
मॉनिटरिंग अभियान के दौरान इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक और यूट्यूब सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 429 आपत्तिजनक पोस्ट और हैंडल की पहचान की गई। जांच में करीब 100 अकाउंट भारत के बाहर से संचालित पाए गए। वहीं, 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार या उसकी सहायता से बनाए गए कंटेंट का इस्तेमाल मिलने का दावा किया गया।
डीपफेक वीडियो और क्लोन आवाज का इस्तेमाल
महाराष्ट्र साइबर ने बताया कि जांच के दौरान ऐसी तस्वीरें मिलीं जिनमें डिजिटल तकनीक से भीड़ को वास्तविकता से अधिक दिखाया गया था। इसके अलावा सिंथेटिक आवाज, क्लोन ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों के नाम पर प्रसारित छेड़छाड़ किए गए वीडियो भी सामने आए। एक केंद्रीय मंत्री से जुड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार कंटेंट की जांच में ऑडियो में 100 प्रतिशत कॉन्फिडेंस के साथ हेरफेर का संकेत मिला, जो सिंथेटिक या क्लोन की गई आवाज की ओर इशारा करता है। वहीं वीडियो विश्लेषण में लगभग 82 प्रतिशत कॉन्फिडेंस के साथ छेड़छाड़ के संकेत पाए गए। जांच किए गए 11 वीडियो सेगमेंट में से 9 को संदिग्ध माना गया।
लोगों से सत्यापन के बाद ही सामग्री साझा करने की अपील
महाराष्ट्र साइबर ने नागरिकों से अपील की है कि संवेदनशील घटनाओं से जुड़े किसी भी फोटो, वीडियो या संदेश को सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। एजेंसी का कहना है कि भ्रामक जानकारी, डीपफेक और गैरकानूनी डिजिटल सामग्री फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठित नेटवर्क के खिलाफ निगरानी और कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।



