पंजाब

अकाल तख्त के आदेश पर CM मान का बड़ा बयान: ‘सभी मंत्री-विधायक सोमवार को होंगे पेश, पूरी श्रद्धा से रखेंगे सरकार का पक्ष’

अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया है कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके प्रत्येक आदेश का पूरी श्रद्धा, सम्मान और निष्ठा के साथ पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किए गए पंजाब विधानसभा के स्पीकर समेत राज्य सरकार के सभी मंत्री और विधायक सोमवार को वहां उपस्थित होकर सरकार का पक्ष विनम्रतापूर्वक रखेंगे।

अमृतसर में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब प्रत्येक सिख के लिए सर्वोच्च आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वहां से आने वाले हर निर्देश को पूरी गंभीरता के साथ स्वीकार किया जाएगा और उसका अक्षरशः पालन किया जाएगा।

‘अकाल तख्त का आदेश हमेशा सर्वोपरि रहेगा’

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनके लिए श्री अकाल तख्त साहिब का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि तख्त साहिब का हर आदेश उनके और उनके परिवार के लिए हमेशा सर्वोपरि रहा है और आगे भी रहेगा।

उन्होंने कहा कि उनकी श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले जब उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब ने तलब किया था, तब वह वहां पहुंचने के लिए भारत के राष्ट्रपति के एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर भी छोड़ चुके हैं।

फर्जी वीडियो का पूरा मामला अकाल तख्त को सौंपेगी सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उनकी छवि खराब करने के लिए प्रसारित की गई कथित फर्जी वीडियो से जुड़ी पूरी जानकारी भी श्री अकाल तख्त साहिब को उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह बताया जाएगा कि किस प्रकार उनकी नकल करने वाले व्यक्ति के वीडियो का इस्तेमाल कर भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि मंत्रियों और विधायकों के अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के बाद आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

विपक्ष पर धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस राजनीतिक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए अब धार्मिक विषयों को राजनीतिक रंग देकर लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल उन्हें धार्मिक रूप से बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि उनकी सरकार रोजगार, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास जैसे जनहित के मुद्दों पर काम कर रही है।

‘धार्मिक पदों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए’

भगवंत मान ने कहा कि जब धार्मिक संस्थाओं से जुड़े पदों पर बैठे लोग राजनीतिक प्रभाव में फैसले लेने लगते हैं तो स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ गुरुद्वारों के बाहर सामाजिक बहिष्कार के पोस्टर लगाने की बात की जा रही है, लेकिन अतीत में अन्य नेताओं के मामलों में ऐसा नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता और संगत सब कुछ देख रही है तथा सही-गलत का फैसला करने में पूरी तरह सक्षम है।

‘जनसमर्थन से परेशान हैं विरोधी दल’

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों, सामाजिक कार्यक्रमों और जनसभाओं में उन्हें लगातार लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार विपक्षी दल इस समर्थन को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और इसी कारण निराधार आरोपों तथा विवादों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग ऐसी राजनीति को समझते हैं और उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

‘संगत ही सर्वोच्च, उसी के अनुसार होगा फैसला’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख परंपरा में संगत सर्वोच्च मानी जाती है और हर निर्णय उसकी भावना के अनुरूप लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगत में सही और गलत का फैसला करने की पूरी क्षमता है और वही अंतिम रूप से न्याय करती है।

महाराष्ट्र सरकार को दी नसीहत

महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने “नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम, 1956” को निरस्त करने के फैसले से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार को सिख समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए, जिनसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हों। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग विषय हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए।

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