
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में नतीजे घोषित होने के बाद प्रत्याशी, छात्र और समर्थक विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव परिणाम के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। यह रोक सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावासों के अंदर भी लागू होगी। अदालत ने इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को दी है। उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
सभी उम्मीदवारों और समर्थकों को तुरंत बताने का निर्देश
अदालत ने परिसर में मौजूद सभी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे आदेश की प्रति का इंतजार किए बिना सभी उम्मीदवारों, छात्रों और उनके समर्थकों को विजय जुलूस पर लगी रोक की जानकारी तुरंत दें।
सुनवाई के दौरान एनएसयूआई की ओर से पेश अधिवक्ता ऋषव रंजन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि संगठन की ओर से कोई विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा। एबीवीपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप ने भी अदालत के निर्देश का समर्थन किया।
140 उम्मीदवारों को जारी किया गया नोटिस
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने डूसू चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों और विभिन्न छात्र संगठनों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने चुनाव नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाने के संबंध में जवाब मांगा है।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पालन जरूरी
हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस को लिंगदोह समिति की सिफारिशों तथा अदालत की ओर से पहले जारी किए गए आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि छात्र संगठनों को चुनाव के दौरान नियमों का पालन करना होगा।
पीठ ने यह भी कहा कि यदि कथित उल्लंघन जारी रहे तो वह सामूहिक हर्जाना लगाने पर विचार कर सकती है।
बड़े वाहन काफिले और कार की छत पर खड़े होने पर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव प्रचार के दौरान बड़े वाहन काफिलों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि ऐसे काफिलों से डर और दबदबे की भावना पैदा होती है। अदालत ने पुलिस से पूछा कि उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
पीठ ने प्रचार के दौरान उम्मीदवारों के कार की छत और बोनट पर खड़े होने को लेकर भी कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने पूछा कि इस तरह का व्यवहार क्या गुंडागर्दी नहीं है और देश की राजधानी में ऐसी स्थिति होना चिंता की बात है।
उम्मीदवारों के व्यवहार पर भी कोर्ट की नाराजगी
अदालत ने विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े उम्मीदवारों के कथित व्यवहार पर भी सवाल उठाए। पीठ ने हथियार लहराने और लग्जरी कारों के काफिले में घूमने जैसी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए छात्र संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाया।
विजय जुलूस निकला तो पुलिस करेगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रत्याशी, छात्र, समर्थक या कोई अन्य व्यक्ति सड़क, विश्वविद्यालय परिसर या छात्रावासों में विजय जुलूस नहीं निकाल सकेगा। इसकी निगरानी और रोकथाम की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की होगी।
अदालत ने कहा कि आदेश का उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है और इसे अदालत की अवमानना भी माना जा सकता है।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के भी निर्देश
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित विभागों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा। दिल्ली नगर निगम समेत अन्य प्राधिकरणों को भी निर्देश दिया गया कि सार्वजनिक संपत्ति को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
पीठ ने कहा कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों और अदालत के पूर्व आदेशों के किसी भी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित एजेंसियां तत्काल कार्रवाई करें।



