पार्क में रामलीला पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक, DDA का फैसला बरकरार; जानिए अदालत ने क्या कहा

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने नारायणा विहार के चिंटू पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पार्क को स्थानीय निवासियों के लिए हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में बनाए रखने की जरूरत को अस्थायी रूप से रामलीला आयोजित करने से अधिक महत्वपूर्ण माना।
अदालत ने हरित क्षेत्र बनाए रखने पर दिया जोर
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए किसी सार्वजनिक पार्क को हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में सुरक्षित रखना जरूरी है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने चिंटू पार्क में रामलीला आयोजन के लिए की गई बुकिंग रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा।
पीठ ने कहा कि पार्क का हरित स्वरूप और स्थानीय निवासियों के लिए उसका इस्तेमाल कुछ समय के लिए रामलीला आयोजित करने की जरूरत से अधिक महत्वपूर्ण है।
DDA का फैसला हाई कोर्ट ने रखा कायम
अदालत ने श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA के फैसले को बरकरार रखा। DDA ने चिंटू पार्क में रामलीला आयोजन के लिए की गई बुकिंग रद्द कर दी थी।
समिति 30 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पार्क में रामलीला आयोजित करना चाहती थी।
समिति ने कहा- दशकों से यहीं हो रहा आयोजन
याचिकाकर्ता समिति की ओर से कहा गया कि वह कई दशकों से इसी स्थान पर हर साल रामलीला का आयोजन करती आ रही है। समिति का दावा था कि आयोजन के लिए उसके पास संबंधित अधिकारियों की जरूरी अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मौजूद हैं।
9 सितंबर को DDA ने रद्द की थी बुकिंग
DDA ने 9 सितंबर को रामलीला के लिए की गई बुकिंग रद्द कर दी थी। आदेश में इसके पीछे हाई कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया था।
समिति ने आरोप लगाया कि बुकिंग रद्द करने से पहले उसे न तो नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला। समिति ने यह भी कहा कि उसे फैसला रद्द करने के कारणों की जानकारी नहीं दी गई।
DDA ने पिछली अदालत की कार्यवाही का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पिछली याचिका में हाई कोर्ट के निर्देश पार्क से अतिक्रमण हटाने, पार्किंग रोकने और इसे हरित क्षेत्र के रूप में बनाए रखने से जुड़े थे। समिति के अनुसार, इन निर्देशों में रामलीला या किसी धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन पर रोक नहीं लगाई गई थी।
वहीं DDA ने कहा कि 5 जनवरी को पारित आदेश के बाद चिंटू पार्क को नारायणा विहार कॉलोनी के निवासियों के कल्याण के लिए पार्क के रूप में बनाए रखा जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की तस्वीरें देखकर अदालत ने कही अहम बात
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पार्क की मौजूदा स्थिति और उसके इस्तेमाल से संबंधित तस्वीरें और स्थिति रिपोर्ट पेश की गई। तस्वीरों में बुजुर्गों और बच्चों को पार्क का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया था।
तस्वीरों को देखने के बाद पीठ ने कहा कि नारायणा विहार के निवासियों के कल्याण के लिए चिंटू पार्क को हरित और मनोरंजन स्थल के रूप में बनाए रखना, रामलीला के लिए उसके अस्थायी इस्तेमाल से अधिक महत्वपूर्ण है।
हरित क्षेत्र को प्रभावित करने की अनुमति नहीं
पीठ ने कहा कि किसी हरित क्षेत्र का इस्तेमाल सार्वजनिक हित के नाम पर भी सामुदायिक भवन या वृद्धाश्रम जैसे स्थायी उपयोग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले का मुख्य मुद्दा पर्यावरण से जुड़ा है और हरित क्षेत्र को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
पीठ के अनुसार, रामलीला के आयोजन से पार्क का मूल स्वरूप प्रभावित होने की आशंका है।



