देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के मुखिया के रूप में पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हुए उत्तराखंड की राजनीति में स्थिरता का नया अध्याय लिखा है। लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व परिवर्तन की चुनौतियों से जूझते रहे राज्य में धामी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्हें समर्थक निर्णायक और ऐतिहासिक कदम के तौर पर देखते हैं। समान नागरिक संहिता, सशक्त भू-कानून, मतांतरण विरोधी कानून, अतिक्रमण के खिलाफ अभियान और पर्यटन विस्तार जैसी पहलों ने मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली को अलग पहचान दी है।
पार्टी संगठन, केंद्रीय नेतृत्व और आम जनता के भरोसे के साथ आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कई ऐसे निर्णय लिए, जिन्हें राजनीतिक दृष्टि से कठिन माना जाता था। इन फैसलों का असर केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक बहसों के केंद्र में भी रहा।
समान नागरिक संहिता लागू कर बनाया राष्ट्रीय उदाहरण
मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करना शामिल है। इसे महिला अधिकारों, समानता और एक समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना गया। उत्तराखंड इस व्यवस्था को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना, जिसके बाद यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बना रहा।

अतिक्रमण के खिलाफ अभियान, 12 हजार एकड़ भूमि कराई कब्जामुक्त
धामी सरकार ने सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। पिछले तीन वर्षों से जारी कार्रवाई के तहत राज्य में करीब 12 हजार एकड़ सरकारी और वन भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। सरकार ने सड़क किनारे और वन क्षेत्रों में बने अवैध धार्मिक अतिक्रमणों के खिलाफ भी कार्रवाई की।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2023 से अब तक 582 अवैध मजारें हटाई गईं, 258 अवैध मदरसों को बंद कराया गया, सरकारी भूमि से नौ मस्जिदें हटाई गईं तथा 42 अन्य धार्मिक संरचनाओं पर भी कार्रवाई की गई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर दोबारा अतिक्रमण होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
ऑपरेशन कालनेमि से असामाजिक तत्वों पर नजर
राज्य की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार ने ऑपरेशन कालनेमि शुरू किया। इस अभियान के तहत अपनी पहचान छिपाकर सामाजिक माहौल प्रभावित करने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने और धार्मिक सद्भाव को प्रभावित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सख्त भू-कानून से बाहरी खरीद पर लगी बड़ी रोक
जनभावनाओं और भूमि संरक्षण की मांग को देखते हुए धामी सरकार ने भू-कानून को और सशक्त बनाया। मई 2025 में लागू संशोधित कानून के तहत हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के अन्य 11 जिलों में बाहरी व्यक्ति कृषि और बागवानी के लिए भूमि नहीं खरीद सकते।
ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय उद्देश्य से बाहरी व्यक्तियों को केवल 250 वर्गमीटर भूमि खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए शपथ पत्र देना भी अनिवार्य किया गया है। कानून के उल्लंघन की स्थिति में खरीदी गई भूमि सरकार में निहित करने का प्रावधान रखा गया है।
मतांतरण विरोधी कानून को बनाया और कड़ा
छांगुर प्रकरण के बाद राज्य सरकार ने धर्म परिवर्तन से जुड़े कानून को और सख्त बनाया। उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता एवं विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन करते हुए दोषियों के लिए 10 लाख रुपये तक जुर्माना और आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य अवैध और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
बारहमासी पर्यटन मॉडल पर सरकार का फोकस
धामी सरकार ने पर्यटन को केवल गर्मियों तक सीमित रखने के बजाय पूरे वर्ष संचालित करने की दिशा में पहल की है। चारधाम के गद्दीस्थलों पर शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के साथ-साथ अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य में ‘एक जिला-एक मेला’ अवधारणा पर काम शुरू किया गया है। धार्मिक यात्राओं और मेलों के बेहतर संचालन के लिए उत्तराखंड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद का गठन भी किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में शीतकालीन पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनेगा।
राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी से बढ़ा खेलों का दायरा

वर्ष 2025 में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी को भी धामी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जा रहा है। खेलों के लिए तैयार की गई आधारभूत सुविधाओं ने राज्य में खेल संस्कृति को नया प्रोत्साहन दिया है। पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना शुरू की गई, जिससे खिलाड़ियों के बीच नई उम्मीद जगी है।
पूर्ण हुआ मंत्रिमंडल, खत्म हुई राजनीतिक अटकलें
वर्ष 2022 में सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल में कई पद लंबे समय तक रिक्त रहे। समय-समय पर विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाएं भी तेज रहीं। हालांकि इस वर्ष मंत्रिमंडल को पूर्ण आकार दे दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुख्यमंत्री धामी की संगठन और सरकार दोनों पर मजबूत पकड़ का संकेत माना जा रहा है।





