उत्तराखंड

धामी का बड़ा वादा बना राष्ट्रीय मॉडल: 3 साल में लागू हुई UCC, अब दूसरे राज्यों के लिए भी बनी मिसाल

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में किया गया समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का वादा अब उत्तराखंड की सबसे चर्चित उपलब्धियों में गिना जा रहा है। चुनावी घोषणा से लेकर कानून के प्रभावी क्रियान्वयन तक का सफर तीन वर्षों के भीतर पूरा हुआ और आज उत्तराखंड की यह पहल देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। राज्य द्वारा दिखाए गए इस रास्ते पर अब अन्य राज्यों ने भी कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

जब विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा की थी, तब इसे एक महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य माना जा रहा था। हालांकि सरकार ने सत्ता में वापसी के बाद इस दिशा में तेजी से काम किया और निर्धारित समय के भीतर इसे कानूनी रूप देकर लागू कर दिया।

27 जनवरी 2025 को लागू हुई थी यूसीसी

उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू की गई थी। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया, जहां यूसीसी को प्रभावी रूप से लागू किया गया। लागू होने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद इसके विभिन्न प्रभाव और परिणाम सामने आने लगे हैं।

सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था ने विवाह, उत्तराधिकार और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा प्रदान किया है। साथ ही महिलाओं के अधिकारों को भी मजबूती मिली है।

बहुविवाह पर रोक, बेटियों को मिले समान अधिकार

समान नागरिक संहिता के लागू होने के बाद बहुविवाह की प्रथा पर रोक लगी है। इसके अलावा बेटियों को पैतृक संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। मृतक की संपत्ति में पत्नी और बच्चों के साथ माता-पिता के अधिकारों को भी कानूनी मान्यता दी गई है।

सरकार का मानना है कि इन प्रावधानों ने महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विवाह और लिव-इन पंजीकरण हुआ अनिवार्य

यूसीसी के तहत विवाह, विवाह विच्छेद और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। वसीयत के पंजीकरण की व्यवस्था लागू होने से कानूनी विवादों और संभावित अनियमितताओं की आशंकाओं को कम करने का प्रयास किया गया है।

लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाए जाने के बाद ऐसे संबंधों में रहने वाले जोड़े औपचारिक रूप से सामने आ रहे हैं। इससे उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की बात कही जा रही है।

लगातार बढ़ रहा पंजीकरण का आंकड़ा

यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में बड़ी संख्या में लोगों ने विवाह पंजीकरण कराया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 4,54,100 व्यक्तियों ने नए विवाह का पंजीकरण कराया है, जबकि 88,775 लोगों ने पूर्व में संपन्न विवाह की जानकारी दर्ज कराई है। कुल मिलाकर अब तक 5.42 लाख से अधिक व्यक्तियों का विवाह पंजीकरण यूसीसी के तहत दर्ज किया जा चुका है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चर्चा

उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद इसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर भी तेज हुई है। राज्य सरकार का दावा है कि उत्तराखंड द्वारा तैयार किए गए मॉडल का अध्ययन अन्य राज्यों द्वारा भी किया जा रहा है और कई राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी यह कानून देश के सबसे चर्चित विषयों में शामिल रहा है।

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