
नई दिल्ली: देश के दो अलग-अलग राज्यों में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। हिमाचल प्रदेश के चंबा और तेलंगाना के नारायणपेट में धरती हिलने से लोगों में हलचल मच गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, दोनों स्थानों पर भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 और 2.5 दर्ज की गई। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी जगह जान-माल के नुकसान या संपत्ति को क्षति पहुंचने की सूचना नहीं है।
तेलंगाना के नारायणपेट में सुबह 6:16 बजे आया भूकंप
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, तेलंगाना के नारायणपेट में शुक्रवार सुबह 6 बजकर 16 मिनट 46 सेकंड पर भूकंप के झटके दर्ज किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.5 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से पांच किलोमीटर नीचे था। इसका स्थान 16.452 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 77.414 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया।
हिमाचल के चंबा में 3.2 रही भूकंप की तीव्रता
वहीं, हिमाचल प्रदेश के चंबा में सुबह 6 बजकर 59 मिनट 46 सेकंड पर धरती कांपी। यहां भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से 15 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप का स्थान 32.719 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.123 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। दोनों घटनाओं में फिलहाल किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।
कैसे आता है भूकंप?
पृथ्वी बाहर से भले ही एक ठोस गोले जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर कई परतें मौजूद हैं। इसकी आंतरिक संरचना को मुख्य रूप से चार हिस्सों में बांटा गया है। सबसे अंदरूनी हिस्से को इनर कोर, उसके बाहर आउटर कोर, फिर मैंटल और सबसे ऊपर क्रस्ट कहा जाता है। क्रस्ट पृथ्वी की सबसे बाहरी ठोस परत है।
क्रस्ट और मैंटल के ऊपरी हिस्से से मिलकर पृथ्वी की कठोर बाहरी परत बनती है, जिसे लिथोस्फीयर कहा जाता है। यह कई बड़ी और छोटी प्लेटों में बंटी होती है। इन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं।
ये प्लेटें लगातार बेहद धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तो पृथ्वी की सतह के भीतर हलचल पैदा होती है। प्लेटों के बीच लंबे समय तक जमा तनाव जब अचानक ऊर्जा के रूप में बाहर निकलता है, तो जमीन कांपने लगती है। इसी प्राकृतिक घटना को भूकंप कहा जाता है।



