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US-Iran डील का असर! होर्मुज से फिर दौड़ने लगे जहाज, लंबी कतार के बीच लागू हुए सख्त नियम

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। लंबे समय तक प्रतिबंधित संचालन के कारण बड़ी संख्या में जहाज इंतजार में खड़े थे, जिससे अब इस समुद्री मार्ग पर भारी दबाव और लंबी कतार की स्थिति बन गई है। हालात को नियंत्रित करने के लिए संबंधित प्राधिकरण ने नए और सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

जहाजों के लिए 48 घंटे पहले अनुमति जरूरी

नई व्यवस्था के तहत किसी भी जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट अनुरोध जमा करना होगा। इसके साथ ही यात्रा के दौरान जहाज का संपर्क संबंधित प्राधिकरण के साथ लगातार बना रहना अनिवार्य होगा। यदि संचार व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिक की मानी जाएगी।

ट्रांजिट आवेदन में जहाज की यात्रा, निर्धारित मार्ग, संपर्क विवरण और पोत से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां देना अनिवार्य किया गया है। अनुमति मिलने के बाद ही जहाज को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की इजाजत दी जाएगी।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिका के सैन्य हमलों के बाद मार्च से इस मार्ग पर सामान्य आवाजाही लगभग बंद हो गई थी और केवल सीमित जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जा रही थी।

खाड़ी देशों के करीब 80 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात इसी मार्ग से होता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए यह समुद्री रास्ता रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग के जरिए प्राप्त करता है।

सुरक्षा कारणों से बढ़ाई गई निगरानी

अधिकारियों के अनुसार युद्ध के दौरान जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी गई थीं। ऐसे में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए नई प्रक्रिया लागू की गई है। जहाजों को निर्देश दिया गया है कि वे होर्मुज क्षेत्र के करीब पहुंचने से पहले ही अपनी अनुमति संबंधी प्रक्रिया पूरी कर लें।

60 दिनों तक नहीं वसूला जाएगा कोई शुल्क

समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक जहाजों से किसी भी प्रकार का पारगमन शुल्क नहीं लिया जाएगा। व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े शुल्क भी अस्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए हैं। रखरखाव और संचालन से जुड़े खर्च संबंधित सरकार स्वयं वहन करेगी।

तेजी से बढ़ी जहाजों की आवाजाही

ताजा आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को कम से कम 25 जहाज इस जलमार्ग से गुजरे। इसके विपरीत अप्रैल में पूरे दिन में केवल 7 से 8 जहाज ही यहां से निकल पा रहे थे। अमेरिका के हमलों के बाद जहाजों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई थी।

शांति वार्ता पर भी पड़ा था असर

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता स्विट्जरलैंड में शुरू होने वाली थी, लेकिन उसी दौरान इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष तेज हो गया। लेबनान में हुए हवाई हमलों के बाद वार्ता को टालना पड़ा। इसके चलते अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा भी रद्द कर दिया गया था।

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