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12 घंटे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से करोड़ों के सपने तक! ओडिशा के युवक ने बदली किस्मत, अब 1.6 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य

नई दिल्ली : आर्थिक तंगी, संघर्ष और सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ एक युवक का सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। ओडिशा के बरगढ़ जिले के रहने वाले अजय कुमार शर्मा ने विपरीत परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाया और आज वह अपने स्टार्टअप के जरिए करोड़ों रुपये के कारोबार की ओर बढ़ रहे हैं। कभी परिवार की हालत ऐसी थी कि उधार पर राशन मिलना भी बंद हो गया था, लेकिन आज उनकी कंपनी 1.6 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के साथ तेजी से विस्तार कर रही है।

जब घर चलाना भी बन गया था चुनौती

अजय कुमार शर्मा ऐसे परिवार से आते हैं जिसने कभी बेहतर आर्थिक स्थिति देखी थी, लेकिन पारिवारिक बंटवारे के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्होंने परिवार का बोझ कम करने के लिए बिना किसी को बताए बेंगलुरु का रुख किया।

शुरुआती दिनों में उन्होंने सब्जियां बेचकर गुजारा किया और बाद में एक आईटी कंपनी में महज 3,000 रुपये महीने की सैलरी पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी शुरू की। रोज 12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत जारी रखी।

दो-तीन घंटे की नींद लेकर सीखी तकनीक

गार्ड की नौकरी करते हुए अजय कंपनी के इंजीनियरों के काम को ध्यान से देखते और नई तकनीकी चीजें सीखने की कोशिश करते थे। कंप्यूटर शिक्षा हासिल करने के लिए उन्होंने रात की शिफ्ट में काम करना शुरू किया। कई महीनों तक वह रोज केवल दो से तीन घंटे की नींद लेकर पढ़ाई और नौकरी दोनों संभालते रहे।

उनकी मेहनत धीरे-धीरे रंग लाई और उन्हें बेहतर अवसर मिलने लगे। इसी दौरान उन्हें अमेरिका की एक आईटी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

अमेरिका की नौकरी छोड़ भारत लौटे, शुरू किया अनोखा स्टार्टअप

विदेश में बेहतर करियर और आरामदायक जीवन के बावजूद अजय का लक्ष्य कुछ अलग करने का था। भारत लौटने के बाद उन्होंने महसूस किया कि सार्वजनिक शौचालयों की खराब स्थिति आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और यात्रियों के लिए बड़ी समस्या है।

इसी विचार से उन्होंने अपने स्टार्टअप के तहत mFresh ब्रांड की शुरुआत की। उनका उद्देश्य ऐसे आधुनिक रिफ्रेशिंग स्टेशन तैयार करना था, जहां लोगों को स्वच्छ और सम्मानजनक सुविधाएं मिल सकें।

एसी वाले पब्लिक टॉयलेट के आइडिया पर लोगों ने उठाए सवाल

जब अजय ने एयर कंडीशनर से लैस आधुनिक सार्वजनिक शौचालय बनाने का प्रस्ताव रखा तो कई निर्माताओं ने इसे अव्यावहारिक बताया। लोगों ने सवाल किया कि आखिर टॉयलेट में एसी की जरूरत क्या है। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और करीब आठ महीने तक लगातार प्रयास करते रहे।

आखिरकार एक निर्माता उनके साथ जुड़ने को तैयार हुआ और जनवरी 2025 में पहला यूनिट शुरू किया गया। शुरुआती दौर में हर महीने लाखों रुपये का खर्च उठाना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने इस सुविधा को स्वीकार करना शुरू कर दिया।

टॉयलेट से आगे बढ़कर बना ‘रिफ्रेशिंग स्टेशन’

आज उनके आधुनिक केंद्रों में एयर कंडीशनिंग के अलावा स्वच्छ शौचालय, स्नान सुविधा, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, लॉकर, डायपर बदलने की व्यवस्था और सैनिटरी पैड डिस्पेंसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रत्येक उपयोग के बाद तत्काल सफाई सुनिश्चित की जाती है ताकि स्वच्छता का उच्च स्तर बना रहे।

इन सुविधाओं को आम लोगों की पहुंच में रखने के लिए शुल्क भी किफायती रखा गया है।

दो लाख लोगों तक पहुंची सेवा, अब 1.6 करोड़ का लक्ष्य

फिलहाल अजय का स्टार्टअप ओडिशा के पुरी और भुवनेश्वर में कई यूनिट संचालित कर रहा है। अब तक दो लाख से अधिक लोग इन सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। कंपनी धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी विस्तार कर रही है, जहां खाटू श्याम, वृंदावन और हरिद्वार जैसे शहरों में नए प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं।

वर्ष 2026 के लिए कंपनी ने 1.6 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है और आने वाले वर्षों में कारोबार को कई गुना बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

व्यवसाय के साथ समाज सेवा पर भी जोर

अजय केवल कारोबार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपनी सामाजिक संस्था के माध्यम से पैतृक गांव में दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल और पूरी तरह निशुल्क सुविधा केंद्र का निर्माण भी कराया है। उनका मानना है कि जिस तरह लोगों ने स्वच्छ पेयजल के महत्व को समझा, उसी तरह सार्वजनिक स्वच्छता और सम्मानजनक सुविधाओं की जरूरत को भी समाज जल्द स्वीकार करेगा।

अजय कुमार शर्मा की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां किसी की मंजिल तय नहीं करतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की ललक और मेहनत के बल पर कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।

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