ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हुए तो मिलेगी राहत! RBI का नया नियम, जानिए कब और कितना मिलेगा मुआवजा

नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों को बड़ी राहत देने की दिशा में अहम कदम उठाया है। नए नियम के तहत ऑनलाइन फ्रॉड या यूपीआई धोखाधड़ी के कुछ मामलों में पीड़ित ग्राहकों को मुआवजा दिया जाएगा। आरबीआई ने इस संबंध में 24 जून 2026 को अधिसूचना जारी की है।
अब तक अधिकांश मामलों में धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह रहता था कि उनका पैसा वापस मिलेगा या नहीं। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद कुछ परिस्थितियों में ग्राहकों को वित्तीय राहत मिल सकेगी।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम
आरबीआई के अनुसार, यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 या उसके बाद होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन पर लागू होगी। यह नियम छोटे वित्त बैंक, भुगतान बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर सभी वाणिज्यिक बैंकों पर प्रभावी रहेगा।
इसके दायरे में यूपीआई भुगतान, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ऑनलाइन कार्ड भुगतान, कार्ड स्वाइप और टैप आधारित लेन-देन समेत लगभग सभी डिजिटल भुगतान माध्यम शामिल होंगे।
फ्रॉड में जिम्मेदारी कैसे होगी तय?
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में यह तय किया जाएगा कि नुकसान के लिए जिम्मेदार कौन है—बैंक, ग्राहक या कोई तीसरा पक्ष। बैंक अब केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे कि ग्राहक लापरवाह था, बल्कि उन्हें अपने दावों को साबित भी करना होगा।
पहली स्थिति: बैंक की गलती तो पूरा पैसा लौटाना होगा
यदि धोखाधड़ी बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में कमी, तकनीकी गड़बड़ी या समय पर चेतावनी न देने जैसी वजहों से हुई है, तो ग्राहक पर कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। ऐसी स्थिति में बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी, चाहे ग्राहक ने शिकायत दर्ज कराई हो या नहीं।
दूसरी स्थिति: तीसरे पक्ष की वजह से हुआ फ्रॉड
अगर किसी भुगतान ऐप, पेमेंट गेटवे, दूरसंचार सेवा प्रदाता या किसी अन्य तीसरे पक्ष की वजह से धोखाधड़ी होती है और इसमें न ग्राहक की गलती हो और न ही बैंक की, तो ग्राहक को पूरी राशि वापस मिल सकती है।
हालांकि इसके लिए जरूरी है कि ग्राहक धोखाधड़ी की घटना के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इसकी जानकारी दे। यदि शिकायत पांच दिन बाद दर्ज की जाती है तो ग्राहक की देनदारी बैंक की आंतरिक नीति के आधार पर तय होगी।
तीसरी स्थिति: ग्राहक की लापरवाही होने पर क्या होगा?
यदि ग्राहक ने अपना ओटीपी साझा किया, किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, फर्जी ऐप डाउनलोड किया या बैंक की चेतावनियों को नजरअंदाज किया, तो मामले की परिस्थितियों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
फिर भी नए नियमों में एक महत्वपूर्ण राहत का प्रावधान किया गया है। यदि ग्राहक ने तकनीकी रूप से लापरवाही की हो, लेकिन नुकसान सीमित हो और उसने तुरंत शिकायत दर्ज कराई हो, तो उसे आंशिक मुआवजा मिल सकता है।
ग्राहक की गलती पर भी मिल सकता है मुआवजा
आरबीआई के नए प्रावधान के तहत कुछ मामलों में ग्राहक की लापरवाही होने के बावजूद राहत दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ने अनजाने में फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया या ओटीपी साझा कर दिया, लेकिन तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक को सूचित कर दिया, तो उसे निर्धारित शर्तों के अनुसार मुआवजा मिल सकता है।
कितना मिलेगा मुआवजा?
अधिसूचना के अनुसार मुआवजा एक व्यक्ति को उसके पूरे जीवनकाल में केवल एक बार दिया जाएगा। मुआवजे की राशि 25,000 रुपये या कुल नुकसान का 85 प्रतिशत, जो भी कम होगा, उतनी होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति के साथ 50,000 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है और वह पात्र पाया जाता है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिलेगा। यदि भविष्य में उसके साथ दोबारा ऐसा फ्रॉड होता है, तो उसे इस योजना के तहत दोबारा मुआवजा नहीं मिलेगा।
ऑनलाइन फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?
किसी भी संदिग्ध लेन-देन की स्थिति में तुरंत बैंक को सूचित करें, हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट करें। समय पर की गई शिकायत न केवल जांच में मदद करती है, बल्कि मुआवजा मिलने की संभावना भी बढ़ाती है।



