
गाजियाबाद टू प्रयागराज वाया गंगा एक्सप्रेस-वे
14 किमी लंबी लिंक रोड का निर्माण कार्य जारी
गाजियाबाद से प्रयागराज जाना होगा अब आसान
जुलाई 2026 तक निर्माण कार्य पूरा होने का लक्ष्य
मेरठ/गाजियाबाद। गाजियाबाद से प्रयागराज का सफर अब मात्र 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा। जी हॉ!ऐसा संभव होगा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली 14 किमी लंबी लिंक रोड का निर्माण से। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) को गंगा एक्सप्रेस वे से जोड़ने का निर्माण कार्य प्रगति पर है। सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई 2026 तक 14 किलोमीटर लंबी लिंक रोड का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और वाहन चालकों के लिए प्रयागराज तक का सफर जाममुक्त और आरामदायक सिद्ध हो सकेगा। लिंक रोड का कनेक्टर गाजियाबाद पास दोनों एक्सप्रेसवे को जोडने का काम करेगा। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज तक की यात्रा सुविधाजनक हो जाएगी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण (खंड-5) को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है।
पांचवां चरण कुल 14.6 किलोमीटर लंबा
गौरतलब है कि इस चरण का काम 3 अप्रैल 2022 को शुरू किया गया था और इसे मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था। हालांकि, अब प्रशासन ने सभी बाधाओं को दूर कर लिया है और बचे हुए निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है। मेरठ एक्सप्रेसवे का यह पांचवां चरण कुल 14.6 किलोमीटर लंबा है, जिसका सीधा विस्तार गाजियाबाद और मेरठ जिलों में है। इस एक्सप्रेसवे का करीब 5.47 किलोमीटर का हिस्सा गाजियाबाद से होकर गुजरेगा। जबकि करीब 9 किलोमीटर का दायरा मेरठ जिले में होगा। यह नया मार्ग गाजियाबाद के तीन गांवों (चूड़ियाला, तल्हेटा और जैनुद्दीनपुर) से होकर निकल रहा है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से इन ग्रामीण इलाकों में विकास की नई उम्मीद जगी है और यहां की जमीनों की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। गाजियाबाद की तरफ वाले पांच किलोमीटर के हिस्से में ज्यादातर काम पूरा कर लिया गया है।
अहम पहलू गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ना
पूरी परियोजना का सबसे अहम पहलू इसका गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में 29 अप्रैल को उद्घाटित किया गया गंगा एक्सप्रेसवे कुल 594 किलोमीटर लंबा है। दिसंबर 2021 में शिलान्यास के बाद तैयार हुआ यह विशाल एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों को जोड़ता है। इन दोनों एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़ने से न सिर्फ यातायात सुगम होगा, बल्कि यह एनसीआर और पश्चिम यूपी के संतुलित औद्योगिक और आर्थिक विकास में बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।



