करोड़ों का गोकुल धाम फिर भी फोरलेन पर बेसहारा पशु! कीरतपुर-मनाली हाईवे पर हर पल हादसे का खतरा, रेडियम बेल्ट भी गायब

मंडी: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सड़क सुरक्षा और बेसहारा पशुओं के संरक्षण को लेकर किए गए दावे जमीनी स्तर पर बेअसर नजर आ रहे हैं। बिलासपुर जिले में टीहरा टनल के पास भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया देश का पहला गोकुल धाम हाईवे पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को रोकने में फिलहाल कामयाब नहीं हो पाया है। सुरक्षित आश्रय स्थल मौजूद होने के बावजूद बड़ी संख्या में बेसहारा पशु सड़क के बीच और डिवाइडरों के पास बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिससे वाहन चालकों के लिए हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है गोकुल धाम
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने गाबर कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन के तहत टीहरा टनल के नजदीक गोकुल धाम विकसित किया था। इस केंद्र में एक साथ 100 से अधिक पशुओं को रखने की क्षमता है। परिसर में आधुनिक डिस्पैंसरी भी बनाई गई है, जहां पशुओं की देखभाल के लिए 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहती है।
इसके बावजूद भगेड़ से टीहरा टनल की तरफ जाने वाले फोरलेन पर डिवाइडरों और सड़क के बीच बेसहारा पशुओं का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। इससे साफ है कि आश्रय स्थल की मौजूदगी के बावजूद हाईवे पर पशुओं की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
रेडियम बेल्ट और टेप लगाने की योजना भी नहीं दिखी
फोरलेन पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच बेसहारा पशुओं का सड़क पर बैठना दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। रात के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे में सड़क पर मौजूद पशु वाहन चालकों को आसानी से नजर नहीं आते।
हादसों को रोकने के लिए एनएचएआई ने पहले फोरलेन पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट और सींगों पर रेडियम टेप लगाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य रात के समय पशुओं को दूर से चमकता हुआ दिखाना था। हालांकि, वर्तमान में किसी भी पशु पर रेडियम बेल्ट या रेडियम टेप नजर नहीं आ रही है।
गोकुल धाम की क्षमता बढ़ाने की तैयारी
इस मामले में एनएचएआई के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि गोकुल धाम में मुख्य रूप से बीमार या वाहन की टक्कर से घायल पशुओं को रखा जाता है। उन्होंने कहा कि इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए गोकुल धाम के साथ वन विभाग की भूमि पर अतिरिक्त शेड बनाने को लेकर डीसी बिलासपुर से बातचीत की गई है और जल्द ही इस विषय पर दोबारा चर्चा होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित टीम को मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि गोकुल धाम में जगह उपलब्ध होती है तो फोरलेन पर मौजूद बेसहारा पशुओं को वहां स्थानांतरित किया जाएगा।



