उत्तर प्रदेशराज्य

गोरखपुर-लखनऊ रेल सेक्शन बना हादसों का हॉटस्पॉट: मोबाइल छीनने वाले गिरोह के हमलों से बढ़ रही यात्रियों के गिरने की घटनाएं

गोरखपुर से गुजरने वाला पूर्वोत्तर रेलवे का गोरखपुर-लखनऊ रेलमार्ग इन दिनों यात्रियों के लिए खतरनाक साबित होता जा रहा है। खासकर गोरखनाथ पुल से डोमिनगढ़ स्टेशन के बीच का सेक्शन लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं की वजह से चिंता का विषय बन गया है। इस रूट पर ट्रेन से गिरने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं, जिनमें कई मामले उजागर हो रहे हैं तो कई दबे रह जा रहे हैं।

सामान्य दुर्घटना बताकर दबाए जा रहे मामले
अब तक सामने आए अधिकांश मामलों में यात्रियों के गिरने की वजह फिसलना या असंतुलन बताया जा रहा है। लेकिन स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन घटनाओं के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह ट्रेन के गेट या खिड़की के पास खड़े यात्रियों को निशाना बनाता है और डंडे से हाथ पर वार कर उनका मोबाइल गिरा देता है, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो जाते हैं। इस दौरान कई यात्री संतुलन खोकर ट्रेन से नीचे गिर जाते हैं और गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

12 अप्रैल की घटना ने बढ़ाई चिंता
12 अप्रैल को हैदराबाद स्पेशल ट्रेन से गोरखपुर आ रहे कुशीनगर के एक यात्री के साथ हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ युवकों ने उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की, जिसके दौरान वह ट्रेन से नीचे गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। हालांकि, इलाज के बाद घायल यात्री ने आधिकारिक तौर पर यह बयान दिया कि वह गेट पर मोबाइल से बात करते समय फिसल गए थे। रेलवे सुरक्षा बल ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया।

जननायक एक्सप्रेस हादसे में सामने आई सच्चाई
एक फरवरी को डोमिनगढ़-गोरखपुर रेलखंड पर 15212 जननायक एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे प्रियांशु कुमार गुप्ता और उनकी बहन प्रिया कुमारी भी इसी तरह के हादसे का शिकार हुए थे। इस दुर्घटना में प्रिया कुमारी के दोनों पैर के पंजे कट गए। शुरुआती जांच में इसे सामान्य दुर्घटना बताया गया, लेकिन मामला सामने आने और दबाव बढ़ने के बाद जांच में खुलासा हुआ कि एक युवक ने मोबाइल पर बात कर रहे भाई-बहन पर डंडे से हमला किया था। इस हमले के चलते दोनों ट्रेन से नीचे गिर गए। बाद में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह रेलखंड शहर के बीचोंबीच स्थित है और इसके किनारे घनी आबादी भी है। इसके बावजूद इस तरह की वारदातें होना सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। जबकि रेलवे सुरक्षा बल द्वारा नियमित गश्त और जागरूकता अभियान चलाने के दावे किए जाते रहे हैं।

यात्रियों में बढ़ रहा डर, सतर्क रहने की जरूरत
इन घटनाओं के बाद यात्रियों में भय का माहौल है। खासकर गेट या खिड़की के पास खड़े होकर मोबाइल इस्तेमाल करना अब जोखिम भरा साबित हो रहा है। ऐसे में यात्रियों को सतर्क रहने और यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।


Related Articles

Back to top button