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डायबिटीज मरीजों के पैरों में दिखें ये 6 लक्षण तो न करें नजरअंदाज, हाई ब्लड शुगर से जुड़ी हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं

नई दिल्ली: डायबिटीज एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जिसमें शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। ऐसा तब होता है जब अग्न्याशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। डायबिटीज मुख्य रूप से टाइप-1 और टाइप-2 होती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज को जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है। इन स्थितियों में ब्लड शुगर बढ़ने के कारण शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर असर पड़ सकता है, जिसमें पैर भी शामिल हैं।

डायबिटीज के कारण पैरों से जुड़ी समस्याओं में डायबिटिक न्यूरोपैथी और पेरीफेरल वस्कुलर डिजीज प्रमुख हैं। डायबिटिक न्यूरोपैथी में लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि पेरीफेरल वस्कुलर डिजीज पैरों में रक्त के प्रवाह को प्रभावित करती है। ऐसे में पैरों में दिखाई देने वाले कुछ बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन

डायबिटिक न्यूरोपैथी नसों को नुकसान पहुंचने की स्थिति है। इसमें पैरों और टांगों में दर्द, जलन, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में इसके लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ मरीजों को काफी अधिक परेशानी हो सकती है। यह समस्या शरीर के दूसरे हिस्सों की नसों को भी प्रभावित कर सकती है।

पैरों में अल्सर या गहरे घाव

डायबिटीज में पैरों पर बनने वाले घावों को गंभीरता से लेना जरूरी है। डायबिटिक फुट अल्सर खुले घाव के रूप में सामने आ सकता है और आमतौर पर पैर के तलवे पर दिखाई देता है। शुरुआत में त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन गंभीर स्थिति में संक्रमण और ऊतक क्षति का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मामलों में प्रभावित हिस्से को काटने तक की स्थिति बन सकती है।

एथलीट फुट और पैरों में दरार

डायबिटीज के मरीजों में एथलीट फुट जैसी फंगल संक्रमण की समस्या भी हो सकती है। इसमें पैरों में खुजली, लालिमा और त्वचा में दरार पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह संक्रमण एक या दोनों पैरों को प्रभावित कर सकता है।

कॉर्न्स और कॉलस बनने लगें

पैरों में किसी जगह लगातार दबाव या रगड़ पड़ने से त्वचा मोटी और सख्त हो सकती है। इसे कॉर्न्स या कॉलस कहा जाता है। डायबिटीज के मरीजों में पैरों की त्वचा में इस तरह के बदलाव दिखाई दें तो उनकी नियमित जांच और देखभाल जरूरी है, क्योंकि नसों की संवेदनशीलता कम होने पर चोट का पता देर से चल सकता है।

नाखूनों में फंगल इंफेक्शन

डायबिटीज के मरीजों में पैर के नाखूनों में फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। इसे ऑनिकोमाइकोसिस कहा जाता है। इसमें खासतौर पर अंगूठे के नाखून का रंग बदल सकता है और नाखून मोटा होने लगता है। कुछ मामलों में नाखून कमजोर होकर टूटने भी लगते हैं। नाखून में लगी चोट के बाद भी फंगल संक्रमण होने की संभावना रहती है।

गैंग्रीन का खतरा

डायबिटीज रक्त वाहिकाओं और रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। गंभीर स्थिति में पैरों की उंगलियों और अन्य हिस्सों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बहुत कम हो सकती है। जब किसी हिस्से में रक्त प्रवाह पूरी तरह बाधित हो जाता है और ऊतक मरने लगते हैं, तो गैंग्रीन की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे गंभीर मामलों में प्रभावित हिस्से को काटने की नौबत भी आ सकती है।

पैरों में बदलाव दिखे तो जांच जरूरी

डायबिटीज के मरीजों को पैरों में किसी भी तरह का घाव, लगातार दर्द, सुन्नपन, रंग में बदलाव, सूजन, संक्रमण या नाखूनों में असामान्य परिवर्तन दिखाई देने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा हो या पैर का रंग काला पड़ने लगे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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