
नई दिल्ली: मोटापे और हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई रिसर्च उम्मीद लेकर आई है। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) कांग्रेस में प्रस्तुत अध्ययन के अनुसार, वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा सेमाग्लूटाइड हार्ट फेलियर के मरीजों में गंभीर जटिलताओं और मौत के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि 2.4 मिलीग्राम की खुराक हृदय संबंधी जोखिम को लगभग 20 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
मोटापे और हार्ट फेलियर मरीजों पर हुआ अध्ययन
शोध में उन मरीजों को शामिल किया गया जो मोटापे के साथ हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन (एचएफपीईएफ) से पीड़ित थे। यह ऐसी स्थिति होती है जिसमें हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होने लगती है। अध्ययन के दौरान पाया गया कि सेमाग्लूटाइड लेने वाले मरीजों में प्लेसिबो समूह की तुलना में बेहतर परिणाम देखने को मिले।
व्यायाम क्षमता और लक्षणों में सुधार के संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, सेमाग्लूटाइड एक शक्तिशाली ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर दवा है, जिसका उपयोग मोटापे के इलाज में किया जाता है। स्टेप-एचएफपीईएफ परीक्षण के जरिए यह जानने की कोशिश की गई कि क्या यह दवा हृदय रोगियों के लक्षणों को कम करने और उनकी शारीरिक क्षमता में सुधार करने में मदद कर सकती है। शुरुआती नतीजों में इसके सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं।
13 देशों में 96 केंद्रों पर हुआ ट्रायल
यह अध्ययन एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के 13 देशों में 96 अलग-अलग केंद्रों पर आयोजित किया गया। इसे डबल-ब्लाइंड, प्लेसबो-नियंत्रित और रैंडम ट्रायल के रूप में संचालित किया गया, जिससे इसके निष्कर्षों को वैज्ञानिक रूप से अधिक विश्वसनीय माना जा रहा है।
दवा को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
हालांकि सेमाग्लूटाइड को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। अमेरिका में वजन घटाने के लिए इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। पिछले महीने कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लंबे समय तक इस दवा का इस्तेमाल करने वाली कुछ महिलाओं में गैस्ट्रोपैरेसिस जैसी गंभीर समस्या विकसित हुई। इस स्थिति में पेट की मांसपेशियां सामान्य रूप से काम करना बंद कर देती हैं, जिससे भोजन पचाने में कठिनाई होती है।
विशेषज्ञों की नजर आगे के नतीजों पर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध हार्ट फेलियर और मोटापे से पीड़ित मरीजों के इलाज के नए रास्ते खोल सकता है। हालांकि दवा के दीर्घकालिक प्रभावों और संभावित दुष्प्रभावों को लेकर आगे भी विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता बनी हुई है।



