अन्तर्राष्ट्रीय

PM मोदी की फ्रांस में बड़ी कारोबारी कूटनीति, वैश्विक उद्योग दिग्गज से मुलाकात; निवेश, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप पर रहेगा फोकस

पेरिस: जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत का पक्ष मजबूती से रखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के अगले चरण में फ्रांस पहुंचे, जहां उन्होंने दुनिया की प्रमुख औद्योगिक कंपनियों में शामिल सेंट-गोबेन के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेनोइट बाजिन से मुलाकात की। इस बैठक को भारत-फ्रांस के बीच निवेश, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत वैश्विक कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने और उन्नत तकनीक आधारित साझेदारियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रहा है। सेंट-गोबेन की भारत में भी मजबूत मौजूदगी है, ऐसे में दोनों पक्षों के बीच विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और आधुनिक औद्योगिक समाधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

तकनीकी नवाचार और निवेश बढ़ाने पर जोर

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का फ्रांस दौरा केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रमुख उद्देश्य तकनीकी नवाचार, वैश्विक निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना भी है। भारत लगातार खुद को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है और यह बैठक उसी रणनीतिक प्रयास का हिस्सा मानी जा रही है।

विवाटेक 2026 में दिखेगी भारत की डिजिटल ताकत

फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विवाटेक 2026 में भी भाग लेंगे, जिसे यूरोप का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप सम्मेलन माना जाता है। इस बार भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता साझेदार देश के रूप में विशेष स्थान दिया गया है, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और डिजिटल नेतृत्व को दर्शाता है।

सम्मेलन में प्रधानमंत्री भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों में हो रही प्रगति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस आयोजन में भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मंडप भी स्थापित किया जाएगा, जहां देश की तकनीकी उपलब्धियों और नवाचारों का प्रदर्शन होगा।

मैक्रों और मोदी की संयुक्त मौजूदगी पर नजर

विवाटेक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कई महत्वपूर्ण सत्रों में संयुक्त रूप से हिस्सा लेंगे। दोनों नेताओं के संबोधन में तकनीकी सहयोग, डिजिटल परिवर्तन, अनुसंधान और नवाचार आधारित साझेदारी पर विशेष फोकस रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच के माध्यम से भारत खुद को वैश्विक डिजिटल हब और नवाचार केंद्र के रूप में और मजबूती से स्थापित करने की कोशिश करेगा। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-फ्रांस संबंधों को भी नई दिशा मिल सकती है।

जी-7 में भी उठाए थे वैश्विक मुद्दे

फ्रांस पहुंचने से पहले जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने सतत विकास, वैश्विक शासन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण रखा था। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने और बेहतर व्यापारिक संपर्कों की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि जी-7 देशों, भारत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत सहयोग से वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिल सकती है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहे प्रभाव का भी उल्लेख किया।

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