
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की तैयारी में है। पार्टी के बैंक खाते फ्रीज होने के मामले में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने घोषणा की है कि उनका गुट कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा, जिसमें टीएमसी को अपने तीन फ्रीज बैंक खातों का सीमित उपयोग करने की अनुमति दी गई है। रितब्रत बनर्जी ने पार्टी फंड में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप भी लगाया है।
हाईकोर्ट ने सीमित उपयोग की दी थी अनुमति
कोलकाता हाईकोर्ट ने टीएमसी के तीन फ्रीज बैंक खातों से रोजमर्रा के खर्चों के संचालन के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर 2026 तक विशेष अधिकारी नियुक्त करते हुए पार्टी के नियमित प्रशासनिक खर्चों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है।
शिकायत के बाद फ्रीज हुए थे खाते
रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट ने 18 जून को बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक निजी बैंक में मौजूद पार्टी के तीन खातों में जमा राशि अपराध से अर्जित धन है। शिकायत दर्ज होने के अगले दिन 19 जून को इन खातों पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया, जिसके बाद इनसे वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी गई।
विशेष अधिकारी की निगरानी में होगा खर्च
अदालत ने आदेश दिया कि तीनों बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता विशेष अधिकारी के समक्ष चेक प्रस्तुत करेंगे। विशेष अधिकारी की मंजूरी के बाद ही बैंक से राशि निकाली जा सकेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि खाते से केवल पार्टी के नियमित संचालन और दैनिक खर्चों के लिए ही धनराशि निकाली जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर होगी विशेष अनुमति याचिका
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट इस मामले में विशेष अनुमति याचिका दायर करेगा। उन्होंने बताया कि कानूनी सलाह लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया गया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय इस मामले का पक्षकार नहीं था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली याचिका में प्रवर्तन निदेशालय भी पक्षकार बनेगा।
160 करोड़ रुपये की हेराफेरी का लगाया आरोप
रितब्रत बनर्जी ने पार्टी फंड में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए। उनका दावा है कि एक कंपनी ने पार्टी फंड का उपयोग कर संपत्तियां खरीदीं और बाद में उन्हीं संपत्तियों का किराया पार्टी द्वारा उसी कंपनी को दिया गया। उन्होंने इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का उदाहरण बताते हुए 160 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया।
टीएमसी ने बताया राजनीतिक कार्रवाई
दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के फैसले का विरोध किया है। पार्टी ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
पूर्व सांसदों के भाजपा में जाने पर भी दिया बयान
टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और सुखेंदु शेखर रॉय के भाजपा में शामिल होने पर रितब्रत बनर्जी ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर निजी संबंधों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राजनीतिक पसंद का निर्णय लेने का अधिकार है और व्यक्तिगत रिश्ते राजनीतिक विचारधाराओं से अलग होते हैं।



