राजनीति

कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ा सियासी संकट! रामलिंगा रेड्डी के बाद अब इस वरिष्ठ मंत्री ने भी ठुकराया विभाग, डीके शिवकुमार सरकार पर बढ़ा दबाव

बेंगलुरु : कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन के बाद मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद अब एक और बड़े मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने उन्हें सौंपे गए विभाग का कार्यभार संभालने से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

फूड विभाग लेने से किया साफ इनकार

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने फूड एंड सिविल सप्लाइज विभाग का प्रभार लेने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें दिए गए मंत्रालय से संतुष्टि नहीं है और जब तक विभागों के आवंटन से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक वह कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे।

देवनहल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुनियप्पा ने स्पष्ट कहा कि वह मौजूदा विभाग स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं और इस मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए।

हाईकमान तक पहुंची नाराजगी

मुनियप्पा ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस मामले से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी अवगत करा दिया गया है। उन्होंने अपनी नाराजगी राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल तक पहुंचाने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि मंत्रालयों का संतुलित और उचित बंटवारा पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह व्यवस्था में सुधार और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान की मांग कर रहे हैं।

रामलिंगा रेड्डी के बाद दूसरा बड़ा झटका

इससे पहले वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उनके इस्तीफे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी ही थी कि अब मुनियप्पा की नाराजगी सामने आ गई।

लगातार सामने आ रही असहमति से यह संकेत मिल रहा है कि नई सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर कई नेता असंतुष्ट हैं और नेतृत्व को जल्द समाधान निकालना पड़ सकता है।

सरकार के लिए बन सकती है बड़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी समय रहते दूर नहीं की गई तो यह सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि कुछ प्रभावशाली नेताओं और उनके करीबी लोगों को महत्वपूर्ण विभाग मिलने से असंतोष बढ़ा है।

सात बार सांसद रह चुके के.एच. मुनियप्पा कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। वह केंद्र की पूर्व यूपीए सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और दलित समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में उनका विरोध कांग्रेस नेतृत्व के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

संकट सुलझाने में जुटा कांग्रेस नेतृत्व

लगातार बढ़ते असंतोष के बीच कांग्रेस नेतृत्व अब स्थिति को संभालने और पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुट गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान नाराज नेताओं को मनाने के लिए क्या कदम उठाता है और डीके शिवकुमार सरकार इस आंतरिक संकट से कैसे बाहर निकलती है।

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