भोपाल के बड़े तालाब पर बढ़ा अतिक्रमण का दबाव! कैचमेंट एरिया में 3 महीने में 11 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रियां, पर्यावरण पर गहराया खतरा

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया से जुड़े नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा और आसपास के इलाकों में तेजी से बढ़ रही प्लॉटिंग ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मास्टर प्लान में इन क्षेत्रों को पर्यावरण सुरक्षा के उद्देश्य से लो-डेंसिटी जोन घोषित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद छोटे-छोटे प्लॉट काटकर उनकी बिक्री और रजिस्ट्रियां लगातार हो रही हैं।
पंजीयन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच राजधानी में कुल 19 हजार संपत्ति रजिस्ट्रियां हुईं। इनमें से 11,220 रजिस्ट्रियां केवल बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र से जुड़े इलाकों में दर्ज की गईं, जिससे इन संवेदनशील क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते निर्माण और आबादी के दबाव का संकेत मिल रहा है।
लो-डेंसिटी जोन के नियमों की हो रही अनदेखी
मास्टर प्लान के अनुसार लो-डेंसिटी क्षेत्र में आबादी का दबाव नियंत्रित रखने के लिए न्यूनतम 1000 वर्गमीटर के भूखंड पर ही निर्माण की अनुमति दी जाती है। इसके साथ ही ऐसे भूखंड पर अधिकतम 60 वर्गमीटर यानी करीब 600 वर्गफीट तक ही निर्माण किया जा सकता है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर 500 से 2000 वर्गफीट तक के छोटे-छोटे प्लॉट काटकर उनकी बिक्री की जा रही है और उनकी रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। इससे कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित बसाहट तेजी से फैल रही है।
रजिस्ट्री रोकने के अधिकार सीमित होने से बढ़ी चुनौती
प्रशासन का कहना है कि हाल ही में पंजीयन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल मास्टर प्लान के आधार पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में प्रशासन के पास रजिस्ट्रियों को रोकने के अधिकार सीमित हो गए हैं, जबकि दूसरी ओर अवैध कॉलोनियों का विस्तार लगातार जारी है।
इन संवेदनशील क्षेत्रों को घोषित किया गया है लो-डेंसिटी जोन
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मास्टर प्लान में आरजी-5 (लो-डेंसिटी) श्रेणी के तहत कई संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें बरखेड़ी कला, बरखेड़ी खुर्द, मेंडोरा-मेंडोरी, खुदागंज, चिचली, बैरागढ़ चिचली, गेहूंखेड़ा, दौलतपुर, चंदनपुरा, प्रेमपुरा और सेवनियां गौड़ सहित कई गांव शामिल हैं।
इन इलाकों में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रावधान है, लेकिन नियमों का प्रभावी पालन नहीं होने के कारण बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र और उससे जुड़ा पारिस्थितिकी तंत्र लगातार दबाव में आता जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण और प्लॉटिंग की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो इसका असर बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है। यही कारण है कि संवेदनशील क्षेत्रों में मास्टर प्लान के प्रावधानों के प्रभावी पालन की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।



