ऋषिकेश। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर बेंगलुरु में आयोजित आयोजन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती उपस्थित हुए। इस दौरान पूज्य स्वामी ने उत्तराखंड़ की दिव्य भेंट शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा श्री श्री रविशंकर जी को किया भेंट। परमार्थ निकेतन, मां गंगा के पावन तट पर स्थित भगवान शिव की दिव्य प्रतिकृति एवं शिवत्व का प्रतीक पावन शिव प्रतिमा पूज्य श्री श्री रविशंकर जी को श्रद्धापूर्वक भेंट की।
आध्यात्मिक एवं दिव्य कार्यक्रम का आयोजन
श्रद्धेय श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर बेंगलुरु में आयोजित भव्य, आध्यात्मिक एवं दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद ने इस कार्यक्रम को और अधिक दिव्य बना दिया। इस अवसर पर श्री अशोक हिन्दुजा जी सपरिवार पधारे। इस आध्यात्मिक आयोजन में देश-विदेश से संतगण, साधक, श्रद्धालु, स्वयंसेवक एवं अनेक गणमान्य अतिथि सम्मिलित हुए।
सनातन मूल्य एवं आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने उद्बोधन में श्री श्री रविशंकर जी एवं आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा विश्वभर में किए जा रहे आध्यात्मिक, मानवीय एवं सेवा कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, ध्यान, प्राणायाम एवं सेवा के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य एवं आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। यह एक प्रेरणादायी आध्यात्मिक आंदोलन है, जिसने लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
भारत के उन महान आध्यात्मिक दूतों में से
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि श्री श्री रविशंकर जी भारत के उन महान आध्यात्मिक दूतों में से हैं जिन्होंने भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन और मूल्यों को आधुनिक भाषा एवं व्यवहारिक रूप में विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया है। उनके द्वारा प्रतिपादित ध्यान, श्वास-प्रश्वास की तकनीकें एवं सेवा-भावना ने मानव जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता का संचार किया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज जब विश्व तनाव, हिंसा, पर्यावरणीय संकट और मानसिक अशांति जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में आर्ट ऑफ लिविंग जैसे संगठन मानवता के लिए एक प्रकाश स्तंभ के समान हैं। उनके मार्गदर्शन में चल रहे वैश्विक शांति, मानव कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्य अत्यंत सराहनीय एवं प्रेरणादायी हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग के हजारों स्वयंसेवक अत्यंत अनुशासन
पूज्य स्वामी जी ने विशेष रूप से आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण विकास एवं किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग के हजारों स्वयंसेवक अत्यंत अनुशासन, समर्पण एवं निस्वार्थ भाव से हर आपदा एवं संकट की घड़ी में मानवता की सेवा में तत्पर रहते हैं। यह सेवा-भाव भारतीय संस्कृति के “वसुधैव कुटुम्बकम्” के आदर्श को साकार करता है, जहाँ संपूर्ण विश्व एक परिवार के रूप में देखा जाता है।



