इंदौर में मौत का जाल बने रंबल स्ट्रिप! सड़क पर उभरी नुकीली कीलों से रोज हादसे, नगर निगम पर उठे सवाल

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम द्वारा शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए फोर लेयर रंबल स्ट्रिप अब वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरे का कारण बनते जा रहे हैं। स्पीड ब्रेकर के विकल्प के तौर पर लगाए गए प्लास्टिक और रबर के ये रंबल स्ट्रिप कुछ ही दिनों में टूटकर उखड़ गए हैं। इनके हटने के बाद सड़क पर बाहर निकली लोहे की नुकीली कीलें लगातार दुर्घटनाओं और टायर पंक्चर की वजह बन रही हैं।
प्रमुख मार्गों पर उखड़े रंबल स्ट्रिप, सड़क पर रह गईं नुकीली कीलें
शहर के अधिकांश स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन्हें सड़क पर मजबूती से फिट करने के लिए लोहे की कीलों का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन स्ट्रिप उखड़ने के बाद वही कीलें सड़क पर बाहर निकल आई हैं। इनसे वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं और अचानक सामने आने वाली कीलों से बचने के प्रयास में चालक नियंत्रण खो बैठते हैं, जिससे आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं।
एलआईजी चौराहे से कलश चौराहे तक चार से अधिक स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से अधिक बताई जा रही है। यहां लगाए गए रबर के स्पीड ब्रेकरों के अधिकांश हिस्से उखड़ चुके हैं और केवल कीलें सड़क पर दिखाई दे रही हैं। एक-एक हिस्से को लगाने के लिए चार से छह कीलों का उपयोग किया गया था, जो अब बाहर निकल चुकी हैं।
इसी तरह पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। एमआर-4, मरीमाता लिंक रोड, बाणगंगा क्षेत्र, एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास तथा मालवा ब्रिज से परदेशीपुरा तक कई स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप और स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।
आईडीए चौराहे पर टूटे रंबल स्ट्रिप से वाहन चालक परेशान
रेसकोर्स रोड स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण चौराहे पर नगर निगम ने फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाए थे, लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद वे टूटने लगे। वर्तमान में यहां अधिकांश स्ट्रिप क्षतिग्रस्त हैं और सड़क पर केवल नुकीली कीलें बची हैं।
स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि सड़क पर निकली कीलों की वजह से उनकी गाड़ी का टायर तीन बार पंक्चर हो चुका है। वहीं, क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाने की आवश्यकता ही नहीं थी। उनका कहना है कि लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे के बीच यातायात की गति सामान्य स्पीड ब्रेकर से भी नियंत्रित की जा सकती थी। लोगों का यह भी कहना है कि वाहनों की धीमी गति के बावजूद रंबल स्ट्रिप का इतनी जल्दी टूट जाना निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी, सड़क सुरक्षा समिति के फैसले भी अधूरे
आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर बनाते समय निर्धारित तकनीकी मानकों और नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं के साथ-साथ वाहन चालकों और यात्रियों को तेज झटकों के कारण कमर दर्द और अन्य शारीरिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर हटाने का निर्णय लिया गया था। साथ ही यह भी तय किया गया था कि समिति की पूर्व अनुमति के बिना कोई नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जाएगा। यदि नियमों का उल्लंघन कर निर्माण किया जाता है तो उसकी पूरी लागत संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूली जाएगी। हालांकि, आदेश जारी होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।



