‘दृश्यम’ जैसी कहानी ने उलझाया ममता हत्याकांड! पति ने शव काटने और ठिकाने लगाने की बात मानी, लेकिन हत्या से किया इनकार

नई दिल्ली: अमेरिका के वर्जीनिया में भारतीय मूल की महिला ममता काफले भट्ट के लापता होने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जुलाई 2024 से लापता ममता का शव अब तक बरामद नहीं हो पाया है। इस मामले में उनके पति नरेश भट्ट पर प्रथम श्रेणी की हत्या, सबूत मिटाने और शव को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान नरेश ने खुद को निर्दोष बताते हुए पत्नी की हत्या करने से इनकार किया। हालांकि, उसने यह स्वीकार किया कि ममता की मौत के बाद उसने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। उसने यह भी माना कि शव को छोटा करने के लिए आरी का इस्तेमाल करने का प्रयास किया था। शव का अब तक पता नहीं चलने के कारण यह मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है।
पति ने अदालत में सुनाई 29 जुलाई की रात की कहानी
अदालत में अपने बयान के दौरान नरेश भट्ट ने बताया कि 29 जुलाई 2024 की रात वह अपनी छोटी बेटी के साथ सोने चला गया था। उसके मुताबिक, उस रात ममता कब कमरे में आईं, इसकी उसे जानकारी नहीं थी।
नरेश का दावा है कि अगली सुबह करीब चार बजे जब उसकी नींद खुली तो कमरे के आसपास अजीब सी गंध महसूस हुई। इसके बाद उसने ममता को बिस्तर के पास बेहोशी की हालत में पड़ा देखा। उसके आसपास उल्टी के निशान थे। नरेश के मुताबिक, वहां कुछ गोलियां और जहरीले कीटनाशक का खुला पैकेट भी मौजूद था। उसने इस घटना को आत्महत्या की कोशिश बताया और कहा कि उस समय उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए।
एक घंटे तक सीपीआर देने का दावा, फिर शव छिपाने की सोची
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ममता को बेहोश देखने के बाद नरेश ने तुरंत पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचना क्यों नहीं दी। अदालत में इस सवाल का जवाब देते हुए उसने कहा कि वह बुरी तरह घबरा गया था और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
उसके अनुसार, उसने करीब एक घंटे तक ममता को सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की। जब उसे लगा कि पत्नी की मौत हो चुकी है, तो वह डर गया और शव को छिपाने के बारे में सोचने लगा।
पोटोमैक नदी में शव फेंकने का बनाया था प्लान
नरेश के बयान के मुताबिक, पत्नी की मौत के बाद सबसे पहले उसने शव को पोटोमैक नदी में फेंकने के बारे में विचार किया। इसके बाद वह अपनी बेटी को आया के पास छोड़कर जरूरी सामान खरीदने के लिए होम डिपो गया।
उसने अदालत में यह भी बताया कि घर लौटने के बाद उसने खुदकुशी करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में अपना इरादा बदल दिया। इसके बाद उसने ममता के शव को कूड़ेदान में रखने का प्रयास किया। हालांकि, पूरा शरीर उसमें नहीं आ सका।
आरी से शव काटने की कोशिश, बाथरूम में मिले खून के निशान
सुनवाई के दौरान नरेश ने एक और चौंकाने वाली बात स्वीकार की। उसने बताया कि उसने ममता के शव को छोटा करने के लिए आरी से काटने की कोशिश की थी। उसका कहना था कि वह पैरों को अलग करना चाहता था, ताकि शव को आसानी से छिपाया जा सके।
नरेश के मुताबिक, उसने बाथरूम में यह प्रयास किया था, लेकिन मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करने के कारण वह इस काम को पूरा नहीं कर पाया।
वहीं, जांच के दौरान बाथरूम की टाइलों, शावर वाले हिस्से और दरवाजे के पास खून के निशान मिलने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन निशानों को मिटाने की कोशिश भी की गई थी। इन तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने घेरा
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने फॉरेंसिक साक्ष्य, डीएनए नमूने और अन्य सबूत अदालत के सामने रखे हैं। गवाहों ने भी ममता के व्यवहार और पति-पत्नी के पारिवारिक संबंधों को लेकर अपने बयान दिए हैं।
अभियोजन पक्ष का दावा है कि परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक सबूत नरेश भट्ट के खिलाफ जाते हैं। वहीं, बचाव पक्ष का तर्क है कि हत्या का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद नहीं है।
दो साल से ज्यादा समय बाद भी नहीं मिला ममता का शव
जांच के मुताबिक, ममता को आखिरी बार 29 जुलाई 2024 को एक वीडियो कॉल के दौरान देखा गया था। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। इस घटना को दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस अब तक उनका शव बरामद नहीं कर पाई है।
नरेश ने अदालत में हत्या से इनकार किया है, लेकिन शव को ठिकाने लगाने और उसे काटने की कोशिश स्वीकार करने से मामला और उलझ गया है। अब अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान यह तय होना बाकी है कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को किस हद तक साबित कर पाते हैं।



