मध्य प्रदेशराज्य

वन्यजीव अपराधों पर होगी सख्त कार्रवाई, न्यायपालिका और वन विभाग ने बनाया बड़ा रोडमैप; भोपाल में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

भोपाल: वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर न्यायपालिका और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर में 4 और 5 जुलाई को ‘वन, वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों से जुड़े प्रमुख मुद्दे’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में वन विभाग के 15 वरिष्ठ अधिकारी, 45 न्यायिक मजिस्ट्रेट और 15 सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारियों (एडीपीओ) ने भाग लिया।

न्यायिक और प्रशासनिक समन्वय पर रहा फोकस

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायिक एवं प्रशासनिक समन्वय को और अधिक मजबूत बनाना था। प्रशिक्षण के जरिए वन अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने, वन्यजीव अपराधों की प्रभावी जांच, डिजिटल साक्ष्यों को न्यायालय में बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने और शासन का पक्ष अधिक सशक्त ढंग से रखने पर विशेष जोर दिया गया।

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने किया शुभारंभ

कार्यशाला का उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने किया। उद्घाटन सत्र में न्यायिक नवाचारों, संस्थागत समन्वय, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण न्याय को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक श्रीमती समिता राजोरा, मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक उमेश पांडे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) मनोज अग्रवाल, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व निदेशक हेमंत शर्मा सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

3,500 मामलों में वृक्षारोपण के दिए गए निर्देश

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2017 से अब तक उनके न्यायिक आदेशों के माध्यम से लगभग 3,500 मामलों में वृक्षारोपण के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप करीब 30 हजार पौधे लगाए गए।

उन्होंने यह भी बताया कि 129 मामलों में जमानत की विशेष शर्त के रूप में वाटर हार्वेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जन-जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित करने का भी माध्यम है।

वन अपराधों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों पर मिला प्रशिक्षण

दो दिवसीय तकनीकी सत्रों में वन भूमि विवाद, जैव विविधता अधिनियम-2002, मध्यप्रदेश वन उपज अधिनियम, वन्यजीव फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

इसके अलावा वन अपराधों की जांच, तलाशी, जब्ती की प्रक्रिया तथा वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों में शिकायत दर्ज करने की कानूनी प्रक्रिया पर भी प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

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