मध्य प्रदेशराज्य

बांधवगढ़ के जंगलों में फिर गूंज रही गौर की चहल-कदमी, कभी हो चुके थे विलुप्त; हाथियों और गिद्धों ने भी बनाया ठिकाना

उमरिया: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है। यहां कभी स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुके गौर एक बार फिर जंगलों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। गौर के अलावा हाथियों और गिद्धों की मौजूदगी भी इस जंगल की जैव विविधता को समृद्ध बना रही है। वहीं, बारहसिंगा की वापसी के लिए भी वन विभाग ने प्रयास तेज कर दिए हैं। वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और उन्हें प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

गौर की वापसी से जंगलों में लौटी रौनक

बांधवगढ़ के जंगलों में गौर की वापसी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक समय यहां से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके गौर अब संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों के चलते दोबारा प्राकृतिक वातावरण में दिखाई दे रहे हैं। उनकी मौजूदगी से जंगलों की जैव विविधता को बढ़ावा मिल रहा है और वन पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत हो रहा है।

2018 में पहुंचे हाथियों ने बांधवगढ़ को बनाया अपना घर

बांधवगढ़ के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी भी लगातार बनी हुई है। वर्ष 2018 में यहां पहुंचे हाथियों ने धीरे-धीरे इस क्षेत्र को अपना नया ठिकाना बना लिया। समय के साथ उन्होंने स्थानीय वातावरण के अनुरूप खुद को ढाल लिया और अब वे बांधवगढ़ के वन्यजीव संसार का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

गिद्धों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना बांधवगढ़

प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मृत जीवों को खाकर ये पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं, इसलिए इन्हें प्रकृति का सफाईकर्मी भी कहा जाता है। बांधवगढ़ के जंगलों और सुरक्षित चट्टानों में गिद्धों को अनुकूल वातावरण मिल रहा है। वन विभाग के संरक्षण प्रयास और सुरक्षित आश्रय इनके अस्तित्व को बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

कान्हा से लाए गए बारहसिंगा, सुरक्षित बाड़े में हो रही देखभाल

बांधवगढ़ में बारहसिंगा की दोबारा आबादी बसाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके लिए कान्हा टाइगर रिजर्व से बारहसिंगा लाकर यहां एक सुरक्षित बाड़े में रखा गया है। फिलहाल उन्हें नए वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया जारी है। इस पहल का उद्देश्य भविष्य में उनके लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार करना और बांधवगढ़ में उनकी वापसी का रास्ता मजबूत करना है।

वन्यजीव संरक्षण से बढ़ेगा प्रकृति पर्यटन का आकर्षण

बांधवगढ़ में गौर, हाथियों और गिद्धों की मौजूदगी के साथ बारहसिंगा को फिर से बसाने की पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल जंगलों की प्राकृतिक समृद्धि बढ़ेगी, बल्कि आने वाले समय में प्रकृति पर्यटन की संभावनाओं को भी बल मिल सकता है। वन विभाग के प्रयासों से यह साफ है कि वन्यजीवों को सुरक्षित आवास और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो जंगलों में जैव विविधता को फिर से मजबूत किया जा सकता है।

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