मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के बरगी बांध में दर्दनाक नाव हादसा: मां और 3 साल के बेटे के एक-दूसरे से लिपटे शव ने रुलाया, अब तक 9 मौतें

मध्य प्रदेश के जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन नौवें शव की तस्वीर ने राहत-बचाव दल तक को भावुक कर दिया। एक महिला का शव मिला, जिसकी गोद में उसका तीन साल का बेटा कसकर लिपटा हुआ था। दोनों को इस हालत में देख मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

मां की गोद में लिपटा मिला मासूम, बचावकर्मी भी हुए भावुक

राहत दल के अनुसार, जब मां और बच्चे के शव को पानी से बाहर निकाला गया, तब बच्चा अपनी मां से मजबूती से चिपका हुआ था। इस दृश्य ने वहां मौजूद बचावकर्मियों को भी झकझोर दिया। बताया गया कि दोनों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, इसके बावजूद इस हादसे में उनकी जान नहीं बच सकी।

24 घंटे से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन, 20 फीट गहराई में फंसी नाव

हादसे के बाद से लगातार बचाव अभियान चलाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पलटी हुई क्रूज नाव करीब 20 फीट की गहराई में फंसी हुई है। उसे बाहर निकालने के लिए गोताखोरों, नावों और भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। टीम लगातार डूबे हिस्सों तक पहुंचने और अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

परिजनों की चिंता और इंतजार के बीच उम्मीद कायम

नर्मदा नदी के किनारे परिजनों का दर्द साफ झलक रहा है। कई परिवार अपने प्रियजनों के बारे में कोई खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हादसे के बाद से माहौल बेहद गमगीन है, लेकिन तलाश जारी रहने के कारण उम्मीद भी बनी हुई है।

अचानक आए तूफान ने पलटी क्रूज, 40-45 लोग थे सवार

यह हादसा गुरुवार शाम को हुआ, जब मध्य प्रदेश पर्यटन की एक क्रूज नाव में करीब 40 से 45 यात्री सवार थे। अचानक तेज तूफान और करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं के कारण नाव अनियंत्रित हो गई। भारी बारिश के बीच नाव तट से लगभग 300 मीटर दूर पलट गई और देखते ही देखते डूबने लगी। शुक्रवार तक नौ लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि गुरुवार को 16 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। हालांकि, अभी भी लापता लोगों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी है।

नाव के अंदर फंसे होने की आशंका, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

अधिकारियों को आशंका है कि डूबी हुई नाव के भीतर अभी भी कई लोग फंसे हो सकते हैं। बचकर निकले लोगों के बयान हादसे की भयावहता को उजागर करते हैं। कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि यात्रा शुरू होने से पहले पर्याप्त सुरक्षा जांच नहीं की गई थी। कुछ का कहना है कि लाइफ जैकेट या तो मौजूद नहीं थीं या फिर हादसे के बाद दी गईं।

स्थानीय ग्रामीण बने पहली मदद की उम्मीद

हादसे के शुरुआती क्षणों में स्थानीय ग्रामीणों ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पानी में रस्सियां फेंककर और खुद उतरकर कई लोगों की जान बचाने में मदद की। राहत और बचाव दल के पहुंचने से पहले ग्रामीण ही लोगों के लिए सहारा बने।

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