तेल संकट के बीच पाकिस्तान ने माना भारत का दम, पेट्रोलियम मंत्री बोले—रणनीतिक भंडार और मजबूत अर्थव्यवस्था से भारत रहा स्थिर

वैश्विक तेल संकट के बीच पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती और ईंधन प्रबंधन की खुलकर सराहना की है। ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बीच मलिक ने भारत और पाकिस्तान की स्थिति का तुलना करते हुए अहम अंतर उजागर किया।
रणनीतिक तेल भंडार ने भारत को दी बढ़त
अली परवेज़ मलिक ने कहा कि भारत के पास मजबूत रणनीतिक तेल भंडार और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जिसके चलते वह मौजूदा संकट के दौरान अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन भारत ने अपने भंडारों के जरिए इस असर को काफी हद तक कम कर लिया।
भारत के पास 60-70 दिन का स्टॉक, पाकिस्तान सीमित संसाधनों में
पाकिस्तानी मंत्री ने स्वीकार किया कि उनके देश के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है और केवल सीमित वाणिज्यिक स्टॉक ही उपलब्ध है। उनके अनुसार पाकिस्तान के पास महज 5 से 7 दिन का कच्चा तेल भंडार है, जबकि परिष्कृत उत्पाद 20 से 21 दिन तक ही चल सकते हैं। इसके विपरीत भारत के पास 60 से 70 दिनों तक का तेल भंडार मौजूद है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है।
भारत ने वैश्विक संकट से निपटने में अपनाई बहुआयामी रणनीति
मलिक ने यह भी कहा कि भारत ने अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करते हुए कई देशों से कच्चा तेल खरीदा और ईंधन करों में कटौती जैसे कदम उठाकर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखा। उन्होंने बताया कि भारत के पास करीब 600 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिसने इस संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आईएमएफ की शर्तों ने पाकिस्तान की स्थिति को किया कमजोर
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर बोलते हुए मलिक ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सख्त शर्तों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने नागरिकों को राहत देने के लिए आईएमएफ से बातचीत करनी पड़ी और बजट के दौरान डीजल और पेट्रोल पर टैक्स लगाने का फैसला भी इन्हीं शर्तों के तहत लिया गया।
डीजल पर टैक्स खत्म, पेट्रोल पर बढ़ा बोझ
मंत्री ने बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पाकिस्तान ने डीजल पर टैक्स को शून्य करने और इसका भार पेट्रोल पर डालने का फैसला किया है। साथ ही मोटरसाइकिल चालकों को लक्षित सब्सिडी देने की योजना भी बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आईएमएफ के साथ बातचीत कर 80 रुपये प्रति लीटर तक टैक्स में कटौती के लिए सहमति बनाई गई।



