West Asia Crisis: NSA अजीत डोभाल बोले- वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, शांति बहाली में हर सहयोग को तैयार भारत

मॉस्को: पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मॉस्को में आयोजित सुरक्षा मामलों के उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि मौजूदा संकट ने वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समुद्री यातायात पर बढ़ता खतरा और ऊर्जा बुनियादी ढांचे में आ रही बाधाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रही हैं।
तेल और गैस सप्लाई पर संकट से बढ़ी चिंता
एनएसए डोभाल ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के जरिए होने वाला व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माना जाता है। ऐसे में इन मार्गों में किसी भी तरह की अस्थिरता दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने साफ कहा कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाली के लिए हर रचनात्मक प्रयास में सहयोग देने को तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
पश्चिम एशिया का संकट उस समय और गहरा गया जब अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमला किया गया। इसके जवाब में ईरान ने सैन्य कार्रवाई के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी कर दी। इस कदम के बाद दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने लगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई।
बताया जा रहा है कि ईरान इस कदम के जरिए अमेरिका पर संघर्षविराम के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर टोलिंग प्रणाली लागू करने पर विचार कर रहा है।
हालांकि अमेरिका ने इस मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की टोलिंग व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा।
संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 1945 में तैयार की गई वैश्विक संस्थाओं की संरचना आज की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस समय गंभीर संस्थागत संकट से गुजर रहा है और इसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला तथा प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में पीएम मोदी ने कहा था कि चाहे यूक्रेन संकट हो या पश्चिम एशिया का तनाव, भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान और संवाद का समर्थक रहा है।



