
नई दिल्ली: आधुनिक जीवनशैली में ज्यादातर लोग डाइनिंग टेबल, सोफा या यहां तक कि बिस्तर पर बैठकर खाना खाते हैं। व्यस्त दिनचर्या और बदलती आदतों के बीच जमीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही मुद्रा में जमीन पर बैठकर भोजन करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी हो सकता है।
विशेष रूप से सुखासन या पालथी मारकर बैठने की स्थिति को शरीर के लिए आरामदायक माना जाता है। आइए जानते हैं जमीन पर बैठकर खाना खाने से जुड़े कुछ संभावित फायदे।
भोजन पर रहता है बेहतर ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन पर बैठकर आराम से भोजन करने से व्यक्ति खाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाता है। इससे भोजन धीरे-धीरे और संतुलित मात्रा में खाने की आदत विकसित हो सकती है। ध्यानपूर्वक भोजन करने से जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना भी कम हो सकती है।
पाचन क्रिया को मिल सकती है मदद
जब व्यक्ति जमीन पर बैठकर भोजन करता है तो खाने के दौरान शरीर स्वाभाविक रूप से थोड़ा आगे और पीछे की ओर झुकता है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रक्रिया पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। हालांकि बेहतर पाचन के लिए संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
शरीर की लचीलापन बनाए रखने में सहायक
पालथी मारकर बैठना कूल्हों, घुटनों और टखनों की मांसपेशियों को सक्रिय रखता है। नियमित रूप से इस मुद्रा में बैठने से शरीर के निचले हिस्से का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि जिन लोगों को जोड़ों या घुटनों की समस्या हो, उन्हें विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही यह मुद्रा अपनानी चाहिए।
बैठने और उठने की प्रक्रिया भी है एक गतिविधि
जमीन पर बैठना और फिर उठना शरीर की कई मांसपेशियों को सक्रिय करता है। उम्र बढ़ने के साथ यह क्षमता शारीरिक संतुलन और गतिशीलता बनाए रखने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञ इसे हल्की शारीरिक गतिविधि के रूप में भी देखते हैं।
तनाव कम करने में मिल सकता है लाभ
सुखासन और पद्मासन जैसी मुद्राएं योग और ध्यान का भी हिस्सा हैं। शांत वातावरण में बैठकर भोजन करने से मानसिक तनाव कम करने और भोजन के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे व्यक्ति अधिक संतुष्टि के साथ भोजन कर पाता है।
रक्त संचार पर सकारात्मक प्रभाव
कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही मुद्रा में बैठने से शरीर में रक्त संचार संतुलित रहने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन सीमित हैं और इसे किसी चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
सावधानी भी है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन पर बैठकर भोजन करना सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता। घुटनों, कमर, गठिया या अन्य शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को ऐसी मुद्रा अपनाने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेनी चाहिए।
संतुलित जीवनशैली है सबसे अहम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन कहां बैठकर किया जा रहा है, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भोजन संतुलित, पौष्टिक और समय पर किया जाए। साथ ही भोजन के दौरान मोबाइल, टीवी और अन्य ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी बनाना भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।



