
मुंबई: बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और दूसरी बीमारियों के मामले बढ़ने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने लगते हैं। कुछ लोग बुखार या दर्द होने पर खुद ही दवाएं खरीदकर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। एंटीबायोटिक का गलत या अनावश्यक इस्तेमाल दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में प्रतिरोध पैदा कर सकता है। वहीं, कुछ दवाएं गलत तरीके से लेने या उनके दुष्प्रभाव के कारण लिवर को भी नुकसान पहुंच सकता है।
क्या है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)?
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR ऐसी स्थिति है, जिसमें बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या अन्य सूक्ष्मजीवों पर उन्हें खत्म करने वाली दवाओं का असर कम होने लगता है। इसके चलते संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है और बीमारी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे वायरल संक्रमणों में ये आमतौर पर प्रभावी नहीं होतीं। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना, गलत दवा का इस्तेमाल करना या चिकित्सकीय निर्देशों का पालन नहीं करना दवा प्रतिरोध की समस्या को बढ़ा सकता है।
हर साल लाखों लोगों की जान ले रहा है AMR
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। दवाओं का असर कम होने से संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है, बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है और उपचार पर होने वाला खर्च भी बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
इसलिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी है। बची हुई दवाएं खुद से लेना या किसी दूसरे व्यक्ति की दवा इस्तेमाल करना भी नुकसानदायक हो सकता है।
एंटीबायोटिक दवाओं का लिवर पर क्या असर पड़ सकता है?
कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के दुष्प्रभाव के रूप में लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। जोखिम दवा के प्रकार, उसकी खुराक, इस्तेमाल की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं है कि हर एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से लिवर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं या फैटी लिवर, फाइब्रोसिस और सिरोसिस होना तय है।
लिवर शरीर में दवाओं सहित कई पदार्थों को संसाधित करने और शरीर के जरूरी कामों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है। यदि दवा लेने के बाद आंखों या त्वचा में पीलापन, गहरे रंग का पेशाब, लगातार उल्टी, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फैटी लिवर से बचने के लिए खानपान पर दें ध्यान
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है। तले-भुने खाद्य पदार्थों, ज्यादा चीनी वाले पेय और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का सेवन सीमित रखना फायदेमंद हो सकता है। वजन नियंत्रित रखना और शराब से परहेज करना भी लिवर की सेहत के लिए अहम है।
फैटी लिवर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोटापा, मधुमेह और शरीर में वसा का असामान्य बढ़ना। इसे केवल खानपान या एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
एंटीबायोटिक लेते समय इन बातों का रखें ध्यान
- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।
- सर्दी-जुकाम या वायरल बुखार में खुद से एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें।
- दवा की खुराक और अवधि को लेकर चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।
- दवा लेने के बाद असामान्य लक्षण दिखें, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
- बची हुई एंटीबायोटिक दवाएं भविष्य में खुद से इस्तेमाल न करें।
एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल न केवल मरीज के इलाज के लिए जरूरी है, बल्कि दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ने से रोकने में भी मदद करता है।



