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पी. विजयन होंगे केरल के नए CM, बीच में ही पोलित ब्यूरो की बैठक छोड़ चले गए नाराज अच्युतानंदन

एजेंसी/ mamta_052016015828पांच राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद ताजपोशी को लेकर सियासी गतिविधि‍यां तेज हो गई है. केरल में CPI(M) ने दिग्गज नेता वीएस अच्युतानंद को साइडलाइन कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया है. पोलित ब्यूरो की बैठक में विजयन को विधायक दल का नेता चुना गया. पार्टी के इस फैसले से नाराज अच्युतानंदन बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए. बैठक के बाद सीताराम येचुरी ने कहा, अच्युतानंदन पार्टी के फिदेल कास्त्रो हैं. वो पार्टी को गाइड और प्रेरित करते रहेंगे.

प. बंगाल में ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया है. ममता वहां से सीधे गवर्नर से मिलने पहुंची और सरकार बनाने का दावा पेश किया है. वो अगले शुक्रवार को सीएम पद की शपथ लेंगी.

23 मई को AGP संग BJP की बैठक
इस बीच, असम में भी सरकार बनाने को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है. बताया जाता है कि 22 मई को विधायक दल की बैठक में जहां सर्वानंद सोनोवाल को नेता चुना जाएगा, वहीं 23 को असम गण परिषद के साथ बीजेपी की बैठक होगी. 24 मई की शाम सर्वानंद सोनोवाल राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

ऐसा पहली बार है जब असम में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. लिहाजा, आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री समेत खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शामिल होंगे.

अच्युतानंद और विजयन में तल्ख रहे हैं रिश्ते
अभी तक माना जा रहा था कि दिग्गज नेता वीएस अच्युतानंद यह गद्दी संभालेंगे. अच्युतानंद और पी विजयन के रिश्ते भी हमेशा तल्ख रहे हैं. लेकिन पार्टी ने अच्युतानंद की जगह विजयन को सीएम बनाने का फैसला लिया है. इस संबंध में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अच्युतानंद को जानकारी भी दे दी है.

दूसरी तरफ तमिलनाडु में बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई अम्मा यानी जयललिता 23 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं.

जयललिता ने शुक्रवार को विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर आधि‍कारिक घोषणा की जाएगी. नवनिर्वाचित AIADMK विधायकों के साथ पार्टी मुख्यालय में शाम पांच बजे बैठक करेंगी. बैठक में जया को विधायक दल का नेता चुना जाएगा. जयललिता ने लगातार चुनाव जीतकर बीते 3 दशक का रिकॉर्ड तोड़ा है. 32 साल पहले एमजी रामाचंद्रन ने ऐसा किया था.

ममता 27 को बनेंगी सीएम
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत हासिल कर सत्ता में वापसी करने वाली ममता बनर्जी ने 27 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की घोषणा की है. शुक्रवार को ममता भी विधायकों के साथ बैठक करेंगी.

बता दें कि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 211 पर विजयी रही. वहीं तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी AIADMK को 232 में से 134 सीटों पर जीत मिली है.

सिर्फ पुडुचेरी में कांग्रेस को फायदा
पुडुचेरी ही सिर्फ ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस को फायदा पहुंचा है. राज्य में कांग्रेस को 15 सीटें मिली हैं. अगर 2011 से तुलना करें तो कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटों पर जीत मिली थी. कांग्रेस को मिले वोट का प्रतिशत भी इस बार 30.6 है. जबकि 2011 में कांग्रेस की झोली में 26.53 प्रतिशत वोट गिरे थे.

‘कांग्रेस को सर्जरी की जरूरत’
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से बदहवास पड़ी कांग्रेस को उसी के नेताओं ने आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है. शशि थरूर और ज्योतिरादित्य सिंधि‍या के बाद दिग्विजय सिंह ने भी पार्टी में बड़े सुधार की वकालत की है. पांच राज्यों के चुनावी नतीजों पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि परिणाम निराशाजनक हैं लेकिन अनपेक्षित नहीं हैं. हमने काफी आत्ममंथन किया है. क्या हमें एक बड़ी सर्जरी के लिए नहीं जाना चाहिए?

अपनों ने दी नेतृत्व बदलने की सलाह
इससे पहले अगला चुनाव युवाओं के भरोसे जीतने का दंभ भरने वाली कांग्रेस को जहां एक ओर शशि‍ थरूर ने नेतृत्व बदलने की सलाह दे डाली, वहीं राहुल गांधी के करीबी ज्योतिरादित्य सिंधि‍या ने कहा कि कांग्रेस को खुद के बारे में सोचने की जरूरत है.

राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूत हुई बीजेपी की पकड़
असम में बीजेपी नई है. लेकिन असम की जीत ने बीजेपी के लिए दूसरे पूर्वोत्तर राज्यों में पैठ बढ़ाने का रास्ता भी खोला है. मौजूदा समय में देखें तो बीजेपी और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकारों का भारत के 69 प्रतिशत क्षेत्र में वर्चस्व है. वहीं कांग्रेस सिमट कर सिर्फ 14 प्रतिशत हिस्सों में ही सत्ता में है.

पांच राज्यों में कांग्रेस की सत्ता बीजेपी के हाथ गई
मई 2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद से अब तक कांग्रेस ने 5 राज्यों में सत्ता गंवा दी है. जहां 2014 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटें मिली थी. वहीं उसके बाद से महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर और अब असम में कांग्रेस को चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है.

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