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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को दिया करारा जवाब

विदेश मंत्री एस जयशंकर, 9वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे दिन अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री माइकल पोम्पिओ से मिले।


बैंकॉक : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर मामले में मध्यस्थता को लेकर एक बार फिर बयान दिया है। डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चाहें तो वो इस मसले में मदद के लिए तैयार हैं। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की पेशकश को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया और साथ ही दोहराया कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर, 9वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे दिन अपने अमेरिकी समकक्ष विदेश मंत्री माइकल पोम्पिओ से मिले। इस दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीर पर कोई चर्चा केवल भारत और पाकिस्तान के बीच होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोम्पिओ से मुलाकात के बाद ट्वीट किया कि आज सुबह अमेरिकी समकक्ष माइक पोम्पिओ को स्पष्ट शब्दों में अवगत कराया कि कश्मीर पर कोई भी चर्चा, यदि सभी सम्भव हैं तो वह केवल और केवल पाकिस्तान के साथ होगी।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से पत्रकारों ने कश्मीर मसले में मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा था। जिसके जवाब में ट्रम्प ने कहा कि अगर भारत-पाकिस्तान चाहे तो वो इस मसले पर मध्यस्थता के लिए तैयार हूं। ट्रंप ने अपने पूरे बयान में कहा, कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के ऊपर है। वे शानदार लोग हैं, अगर वह चाहते हैं कि इस मसले में मदद के लिए कोई हस्तक्षेप करे। मैंने इसको लेकर पाकिस्तान और भारत से बात की है, क्योंकि लेकिन लम्बे समय से यह लड़ाई चल रही है। डोनाल्ड ट्रम्प ने साथ ही कहा कि यह वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्भर है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिनों पहले कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने का आग्रह किया है। हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने इसके तुरंत बाद उनके इस बयान से किनारा करते हुए स्पष्ट किया था कि अमेरिका इसे द्विपक्षीय मसला मानता है। भारत की ओर से भी इसको लेकर आपत्ति जताई गई है।

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