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सैलरी क्लास को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, डबल होगी ग्रैच्यूटी

संसद के मॉनसून सत्र में निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को 20 लाख की ग्रेच्यूटी को टैक्स फ्री करने वाला विधेयक पेश किया जा सकता है. हालांकि, अभी इस निजी क्षेत्र के कमर्मचारियों को 10 लाख की ग्रेच्यूटी पर टैक्स से छूट प्रदान की गयी थी.

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श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कर मुक्त ग्रैच्युटी सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये किये जाने से संबंधित विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है. केंद्रीय कैबिनेट से इसे मंजूरी दे दी जाती है तो केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही निजी क्षेत्र के कर्मियों को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा. जाहिर है कि इससे एंप्लॉयीज़ को रिटायरमेंट के वक्त ग्रेच्यूटी का अधिक पैसा मिलेगा.

17 जुलाई से मॉनसून सत्र

संसद का मॉनसून सत्र 17 जुलाई से शुरू हो रहा है. विधेयक में ग्रेच्यूटी भुगतान कानून में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि केंद्र सरकार कर्मचारियों के आय स्तर में वृद्धि के आधार पर संसद के जरिये कानून में संशोधन का रास्ता अपनाये बिना कर मुक्त ग्रैच्यूटी की सीमा बढ़ा सके.

सरकार में बन चुकी है सहमति

ग्रेच्यूटी भुगतान संशोधन विधेयक की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर दत्तात्रेय ने बताया कि यह हमारे एजेंडे में है. कानून में संशोधन के बाद संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी 20 लाख कर मुक्त ग्रेच्यूटी के हकदार होंगे. इससे पहले फरवरी में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम मंत्रालय के साथ द्विपक्षीय विचार-विमर्श में इस प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी.

किसे मिलती है ग्रैच्यूटी?

ग्रैच्यूटी कर्मियों की सैलरी का हिस्सा होता है लेकिन इसका भुगतान प्रति माह नहीं किया जाता. ग्रैच्यूटी का पैसा कर्मियों को या तो नौकरी छोड़ने के बाद मिलता है नहीं तो रिटायरमेंट के समय एक मुश्त दिया जाता है. हालांकि इस भुगतान के लिए जरूरी होता है कि कर्मियों की कम से कम पांच साल की नौकरी संस्थान के साथ पूरी हो. वहीं कर्मी की मौत हो जाने की स्थिति में ग्रैच्यूटी का पैसा उसके परिवार को दे दी जाती है. पेमेंट ऑफ ग्रैच्यूटी एक्ट, 1972 के मुताबिक कोई संस्था (फैक्ट्री, माइन, ऑयलफील्ड, प्लांटेशन, पोर्ट और रेलवे कंपनी अथवा दुकान) जहां 10 से अधिक कर्मचारी कम से कम एक साल से कार्यरत हैं तो संस्था को उन्हें ग्रैड्यूटी देना अनिवार्य होगा.

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