झारखंड में कुपोषण पर बड़ा प्रहार, 60 हजार स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के साथ मिलेंगे न्यूट्री बार और कुकीज, 8 जिलों में शुरू हुआ अभियान

झारखंड में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ पोषक तत्वों से भरपूर न्यूट्री कुकीज और न्यूट्री बार भी दिए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य बच्चों में छिपी भूख और पोषण की कमी को दूर करना है।
8 जिलों के 60 हजार बच्चों को मिलेगा लाभ
इस अभियान के तहत राज्य के आठ जिलों के 24 प्रखंडों में करीब 60 हजार स्कूली बच्चों को इसका लाभ दिया जाएगा। इनमें पाकुड़, पलामू, रांची का राहे प्रखंड, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और गोड्डा शामिल हैं। प्रत्येक जिले के तीन से पांच प्रखंडों को योजना में जोड़ा गया है और बच्चों को सप्ताह में पांच दिन इन विशेष पोषक आहारों का वितरण किया जाएगा।
संयुक्त प्रयास से चल रही पहल
यह पहल हार्वेस्ट प्लस साल्यूशंस, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी और भारतीय लोक कल्याण संस्थान के संयुक्त प्रयास से संचालित की जा रही है। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, सरकार के सहयोग से इस योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आदिम जनजाति के बच्चों पर विशेष फोकस
इस योजना का मुख्य लक्ष्य आदिम जनजाति समुदाय के बच्चों को पोषण उपलब्ध कराना है। इसमें माल पहाड़िया, असुर और साबिर (सबर) जैसे जनजातीय समूहों के बच्चे शामिल हैं, जहां कुपोषण की समस्या अधिक देखी जाती है। इस पहल के जरिए इन बच्चों को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है।
पोषक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति
कार्यक्रम के तहत बायोफोर्टिफाइड यानी पोषक तत्वों से समृद्ध फसलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आयरन के लिए बाजरा, जिंक के लिए गेहूं और चावल तथा कैल्शियम के लिए रागी की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन फसलों से तैयार खाद्य सामग्री बच्चों के भोजन में शामिल की जाएगी, जिससे उन्हें संतुलित पोषण मिल सके।
‘न्यूट्री पाठशाला’ से बढ़ेगी जागरूकता
योजना के तहत ‘न्यूट्री पाठशाला’ की अवधारणा भी लागू की जा रही है। चयनित स्कूलों की दीवारों पर पोषण से जुड़ी जानकारी चित्रों और संदेशों के माध्यम से प्रदर्शित की जाएगी। बच्चों को न्यूट्री डायरी दी जाएगी, जिसमें उनके स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े आंकड़े दर्ज होंगे। साथ ही विशेष कक्षाएं, नुक्कड़ नाटक और कठपुतली शो के जरिए भी जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
किसानों और समुदाय को भी जोड़ा जा रहा
इस पहल में स्थानीय किसानों को भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पारंपरिक और लुप्त हो रहे बीजों के संरक्षण के साथ बायोफोर्टिफाइड फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सामुदायिक कार्यकर्ताओं और आजीविका समूहों को प्रशिक्षण देकर गांव-गांव पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की योजना बनाई गई है।
स्वस्थ भविष्य की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल झारखंड में कुपोषण के खिलाफ प्रभावी कदम साबित हो सकती है। यदि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।



