चीन पहुंचते ही ट्रंप टीम पर ‘डिजिटल लॉकडाउन’, US अधिकारियों के फोन-लैपटॉप तक हो जाते हैं जब्त

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा सिर्फ कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर ही संवेदनशील नहीं मानी जाती, बल्कि इसे साइबर सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद हाई अलर्ट मिशन माना जाता है। यही वजह है कि चीन पहुंचने से पहले अमेरिकी अधिकारियों की पूरी डिजिटल दिनचर्या बदल दी जाती है। रोजमर्रा में स्मार्टफोन, लैपटॉप और क्लाउड सेवाओं पर निर्भर रहने वाले अधिकारियों को अपने निजी उपकरण पीछे छोड़ने पड़ते हैं और उनकी जगह विशेष “क्लीन डिवाइस” उपलब्ध कराए जाते हैं।
इन विशेष उपकरणों में सीमित सुविधाएं होती हैं और इनमें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि चीन दुनिया के सबसे आक्रामक साइबर निगरानी वाले देशों में शामिल है, इसलिए वहां की हर डिजिटल गतिविधि संभावित खतरे के दायरे में मानी जाती है।
चीन दौरे पर लागू होता है ‘डिजिटल लॉकडाउन’
रिपोर्टों के मुताबिक चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को बेहद नियंत्रित डिजिटल माहौल में काम करना पड़ता है, जिसे “डिजिटल लॉकडाउन” कहा जाता है। इस दौरान अधिकारियों को निजी फोन, लैपटॉप और टैबलेट इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। कई बार उन्हें अस्थायी ईमेल अकाउंट, सीमित इंटरनेट सुविधा और नियंत्रित संचार माध्यम दिए जाते हैं।
इतना ही नहीं, क्लाउड डेटा, संपर्क सूची और सामान्य मैसेजिंग एप्लिकेशन तक पहुंच भी सीमित कर दी जाती है। कई अधिकारियों को कई दिनों तक अपने सामान्य डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह दूर रहना पड़ता है।
होटल का Wi-Fi और इंटरनेट नेटवर्क भी माना जाता है जोखिम
अमेरिकी प्रशासन यह मानकर चलता है कि चीन में होटल नेटवर्क, सार्वजनिक वाई-फाई और यहां तक कि निजी उपकरण भी निगरानी के दायरे में हो सकते हैं। इसी कारण संवेदनशील बैठकों और बातचीत के लिए विशेष सुरक्षित कमरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक जासूसी से बचाने के लिए तैयार किया जाता है।
सुरक्षा विशेषज्ञ बिल गेज, जो “सेफ हेवन सिक्योरिटी ग्रुप” से जुड़े हैं, ने कहा कि चीन रवाना होने से पहले अमेरिकी अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी जाती है कि वे जो कुछ भी बोलेंगे, लिखेंगे या डिजिटल माध्यम से साझा करेंगे, उसकी निगरानी संभव है।
हर बातचीत रिकॉर्ड होने का रहता है खतरा
पूर्व व्हाइट हाउस मुख्य सूचना अधिकारी थेरेसा पायटन ने भी चेतावनी दी है कि अधिकारियों को यह मानकर चलना पड़ता है कि उनकी हर डिजिटल और निजी बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी अधिकारी विदेश यात्राओं के दौरान विशेष सुरक्षित कमरों का इस्तेमाल करते हैं।
इन कमरों को “संवेदनशील गोपनीय सूचना सुविधा” कहा जाता है। ये अत्यधिक सुरक्षित कमरे होते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, हैकिंग और जासूसी से बचाने के लिए विशेष तकनीक के जरिए तैयार किया जाता है। कई बार इन्हें होटल या किसी नियंत्रित परिसर के भीतर अस्थायी रूप से बनाया जाता है।
इन सुविधाओं का इस्तेमाल केवल बेहद संवेदनशील और गोपनीय चर्चाओं के लिए किया जाता है, ताकि किसी बाहरी एजेंसी या साइबर नेटवर्क के जरिए जानकारी लीक न हो सके। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि चीन दुनिया की सबसे शक्तिशाली साइबर निगरानी प्रणालियों में से एक संचालित करता है। यही कारण है कि चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को सीमित इंटरनेट, अस्थायी उपकरण और नियंत्रित संचार प्रणाली के सहारे काम करना पड़ता है।



