ITR भरने वालों के लिए बड़ा अलर्ट: तय तारीख के बाद रिटर्न दाखिल किया तो देना होगा ₹5,000 जुर्माना, जानिए पूरी डेडलाइन

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 और असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए अहम अपडेट सामने आया है। आयकर विभाग ने ITR-1 और ITR-4 फॉर्म की ऑनलाइन और ऑफलाइन यूटिलिटी शुरू कर दी है। इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों, पेंशनर्स और छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। हालांकि, तय समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर टैक्सपेयर्स को जुर्माना और ब्याज दोनों देना पड़ सकता है।
इन टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई है आखिरी तारीख
आयकर विभाग के अनुसार जिन टैक्सपेयर्स के खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। इसमें नौकरीपेशा कर्मचारी, पेंशनभोगी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और फ्रीलांसर्स शामिल हैं।
वहीं धारा 44AD, 44ADA और 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम में आने वाले छोटे कारोबारी, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रोफेशनल्स भी 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन वाले मामलों की अलग डेडलाइन
जिन कंपनियों, फर्मों या कारोबारियों के खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, उनके लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन से जुड़े बिजनेस और कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रिटर्न दाखिल करने का समय दिया गया है।
देरी हुई तो लगेगा ₹5,000 तक जुर्माना
यदि कोई टैक्सपेयर तय समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं करता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत उस पर ₹5,000 तक की लेट फीस लगाई जा सकती है। इसके अलावा बकाया टैक्स पर धारा 234A के तहत हर महीने 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि देर से रिटर्न भरने पर केवल जुर्माना ही नहीं लगता, बल्कि कई वित्तीय सुविधाओं का नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है और बिजनेस लॉस या कैपिटल लॉस को अगले वर्षों में एडजस्ट करने की सुविधा भी नहीं मिलती।
फॉर्म-16 मिलने के बाद ही भरें रिटर्न
टैक्स विशेषज्ञों ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे जल्दबाजी में ITR दाखिल न करें। कर्मचारियों को पहले अपने नियोक्ता से मिलने वाले Form-16 का इंतजार करना चाहिए, जो आमतौर पर जून महीने में जारी किया जाता है।
इसके बाद Form-16 का मिलान Form-26AS और AIS यानी Annual Information Statement से जरूर कर लेना चाहिए। इससे रिटर्न में गलती की संभावना कम होगी और बाद में Revised ITR दाखिल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



