कर्नाटक की सियासत में बड़ा संकेत! सिद्धारमैया के पैर छूते दिखे डी. के. शिवकुमार, नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच हुई ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस मुलाकात के दौरान सामने आई तस्वीरों में डी. के. शिवकुमार को सिद्धारमैया के पैर छूते और उन्हें गले लगाते हुए देखा गया, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित इस नाश्ता बैठक में कई कैबिनेट सहयोगी भी मौजूद रहे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा दोनों शीर्ष नेताओं के बीच दिखी नजदीकी को लेकर हो रही है। तस्वीरों के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि कांग्रेस हाईकमान राज्य में बड़े नेतृत्व बदलाव की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी
जानकारी के अनुसार, यह बैठक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार सहित वरिष्ठ मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता और सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी तस्वीरों में दोनों नेताओं को गले मिलते और बातचीत करते देखा गया, जबकि एक तस्वीर में डी. के. शिवकुमार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पैर छूते नजर आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर चल रही सियासी हलचलों का संकेत भी हो सकता है।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर हुईं तेज
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान के स्तर पर कर्नाटक नेतृत्व को लेकर मंथन जारी है। चर्चाओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद में बदलाव की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिसमें डी. के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें भी शामिल हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अंतिम निर्णय विधायक दल की बैठक के बाद ही लिया जाएगा।
दिल्ली बैठकों से जुड़ रहा मामला
सूत्र यह भी बताते हैं कि हाल ही में सिद्धारमैया और डी. के. शिवकुमार को दिल्ली बुलाकर कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के साथ अलग-अलग दौर की बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और वरिष्ठ संगठन नेताओं के साथ राज्य की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
इसके बाद बेंगलुरु में हुई इस ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ को भी उसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा फैसला संभव बताया जा रहा है।
समर्थकों में बढ़ी हलचल
संभावित बदलाव की चर्चाओं के बीच दोनों नेताओं के समर्थकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां डी. के. शिवकुमार के समर्थक उन्हें अगला मुख्यमंत्री बताकर जश्न मना रहे हैं, वहीं सिद्धारमैया समर्थक इस तरह की अटकलों का विरोध कर रहे हैं।
कई इलाकों में समर्थकों की भीड़ और नाराजगी दोनों ही देखने को मिल रही है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
रोटेशनल CM फॉर्मूले की फिर चर्चा
गौरतलब है कि 2023 में कांग्रेस की जीत के बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डी. के. शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। उस समय ‘रोटेशनल मुख्यमंत्री’ फॉर्मूले की भी चर्चाएं सामने आई थीं, जिसके तहत ढाई-ढाई साल के नेतृत्व की बात कही गई थी।
हालांकि पार्टी ने इस फॉर्मूले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी, लेकिन अब ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं।
अब सिद्धारमैया और डी. के. शिवकुमार की यह मुलाकात राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है या केवल शिष्टाचार, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा। फिलहाल कर्नाटक की सियासत एक बार फिर बड़े फैसले के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है।



