बिहार

NEET के नाम पर चल रहा था करोड़ों का ठगी नेटवर्क! टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर, बिहार से 4 और गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को ठगने वाले एक बड़े ऑनलाइन गिरोह का बिहार के मुजफ्फरपुर में पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने टेलीग्राम के जरिए कथित प्रश्नपत्र बेचकर ठगी करने वाले नेटवर्क के चार और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी थी। इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

NEET परीक्षा को लेकर पिछले महीने पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में चर्चा तेज हुई थी। इसी बीच सामने आए इस मामले ने एक बार फिर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब 21 जून को परीक्षा आयोजित होने वाली है।

टेलीग्राम पर असली पेपर दिलाने का झांसा

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर कई ग्रुप और चैनल संचालित कर रहे थे। इन माध्यमों से छात्रों और अभिभावकों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले उन्हें NEET का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा।

इसके बदले उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी। बेहतर भविष्य और सफलता की उम्मीद में कई छात्र एवं अभिभावक इस झांसे में आ जाते थे। आरोपियों ने इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।

गुप्त सूचना से खुला पूरा खेल

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, 2 जून को पुलिस को सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से एक गिरोह फर्जी NEET प्रश्नपत्र तैयार कर टेलीग्राम के माध्यम से बेच रहा है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की, जहां से मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया। शुरुआती जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

विशेष जांच दल के गठन के बाद हुई कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया। पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की जांच के बाद पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफल रही। कार्रवाई के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया। वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को पकड़ा गया।

पूछताछ में सामने आया ठगी का पूरा तरीका

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों से संपर्क करते थे। पहले उन्हें कुछ नमूना सामग्री भेजी जाती थी ताकि विश्वास पैदा किया जा सके। इसके बाद असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर ऑनलाइन भुगतान की मांग की जाती थी।

रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर आरोपियों द्वारा संपर्क समाप्त कर दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

मोबाइल फोन से मिले अहम डिजिटल सबूत

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इन माध्यमों से कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाया गया था।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना व्यापक था और इसके तार किन-किन राज्यों तक फैले हुए थे। साथ ही आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

21 जून की परीक्षा से पहले पुलिस ने जारी किया अलर्ट

आगामी 21 जून को होने वाली परीक्षा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति, संस्था या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है, तो उस पर बिल्कुल भरोसा न करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सक्रिय ऐसे साइबर गिरोह छात्रों की चिंता और सफलता की इच्छा का फायदा उठाकर उन्हें ठगी का शिकार बनाते हैं।

पुलिस बोली- और भी हो सकती हैं गिरफ्तारियां

पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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