ईरान पर प्रतिबंध हटे तो भारत की खुल सकती है किस्मत! सस्ता तेल, चाबहार पोर्ट और व्यापार में मिल सकता है बड़ा फायदा

नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव कम होने की संभावनाओं के बीच भारत के लिए आर्थिक मोर्चे पर नई उम्मीदें नजर आने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील मिलती है और समुद्री व्यापार मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाते हैं, तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार और रणनीतिक कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।
माना जा रहा है कि लंबे समय से बाधित कई आर्थिक अवसर फिर से खुल सकते हैं, जिससे भारत की आयात लागत कम होने के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रभाव भी मजबूत हो सकता है।
भारत के लिए क्यों बेहद महत्वपूर्ण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
भारत के लिए इसकी अहमियत और भी अधिक है क्योंकि देश अपने कच्चे तेल के आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। इसके अलावा एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति भी काफी हद तक इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर करती है।
यदि इस क्षेत्र में स्थिरता लौटती है और जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य होती है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और निर्बाध हो सकती है।
प्रतिबंध हटे तो फिर बन सकता है ईरान बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
प्रतिबंध लागू होने से पहले ईरान भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। वर्ष 2018 से पहले भारत बड़ी मात्रा में ईरानी तेल आयात करता था। उस समय ईरान भारतीय कंपनियों को भुगतान में लचीलापन और परिवहन लागत में रियायत जैसी सुविधाएं भी देता था।
यदि प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो भारतीय रिफाइनरियों को एक और बड़ा आपूर्तिकर्ता उपलब्ध होगा, जिससे तेल खरीद में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बेहतर कीमतों पर सौदे संभव हो सकेंगे।
तेल खरीद में बढ़ेगी भारत की मोलभाव क्षमता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की वापसी से भारत को रूस, सऊदी अरब और इराक के अलावा एक अतिरिक्त बड़ा स्रोत मिल जाएगा। इससे भारतीय कंपनियां विभिन्न देशों से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल खरीद सकेंगी।
इसके साथ ही किसी एक या दो देशों पर अत्यधिक निर्भरता भी कम होगी, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।
चाबहार पोर्ट से मिल सकती है रणनीतिक बढ़त
ईरान का चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के कारण अब तक इसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो सका था।
हालात सामान्य होने पर चाबहार पोर्ट के माध्यम से भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मार्ग में पाकिस्तान पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चाबहार का प्रभावी उपयोग भारत के क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को नई गति दे सकता है।
भारतीय निर्यातकों के लिए खुल सकता है बड़ा बाजार
प्रतिबंधों से पहले भारत ईरान को चावल, चाय, दवाइयां, रसायन और इंजीनियरिंग उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता था। यदि आर्थिक गतिविधियां सामान्य होती हैं और प्रतिबंध कम होते हैं, तो भारतीय निर्यातकों के लिए ईरान एक बार फिर बड़ा बाजार बन सकता है।
इससे भारतीय उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
क्या महंगाई पर भी पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है और तेल-गैस की आपूर्ति स्थिर होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
इसका असर भारत में ईंधन लागत, परिवहन खर्च और रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, महंगाई में राहत की वास्तविक सीमा वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी कर नीतियों पर भी निर्भर करेगी।
ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी में मिल सकता है बड़ा अवसर
विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान पर प्रतिबंधों में संभावित ढील और पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए बहुआयामी अवसर लेकर आ सकती है। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने, व्यापार बढ़ने और चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक परियोजनाओं को गति मिलने से भारत को दीर्घकालिक आर्थिक और सामरिक लाभ मिल सकता है।



