UNSC सुधार पर भारत का दोटूक संदेश! ‘सिर्फ अस्थायी सीटें बढ़ाने से नहीं होगा बदलाव’, संयुक्त राष्ट्र में उठाई बड़ी मांग

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की बहस के बीच भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट और कड़ा रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा है कि केवल अस्थायी सदस्य देशों की संख्या बढ़ा देना वास्तविक और प्रभावी सुधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि सुधार प्रक्रिया केवल दो वर्ष के कार्यकाल वाली सीटों के विस्तार तक सीमित रही, तो इससे सुरक्षा परिषद की संरचना और शक्ति संतुलन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
भारत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, संतुलित और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए स्थायी सदस्यता के विस्तार पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
‘शक्ति का केंद्र आज भी स्थायी सदस्य ही हैं’
भारत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों के पास केंद्रित है। ऐसे में केवल अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने से वैश्विक शक्ति संतुलन में कोई ठोस परिवर्तन नहीं होगा।
पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि दुनिया के कई देश और क्षेत्रीय समूह लंबे समय से सार्थक सुधारों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्थायी सदस्यता के विस्तार को ही व्यापक सहमति का प्रतीक मान लेना उचित नहीं होगा, क्योंकि इस मुद्दे से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण पहलू भी हैं, जिन पर गंभीर विचार की आवश्यकता है।
वार्ता प्रक्रिया को लेकर भी भारत ने जताई चिंता
भारत ने सुरक्षा परिषद सुधारों पर चल रही अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की मांग की। भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की अन्य प्रक्रियाओं की तरह यहां भी एक स्पष्ट लिखित प्रस्ताव के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि सदस्य देश अपने सुझाव और आपत्तियां व्यवस्थित रूप से दर्ज कर सकें।
हरीश ने सुझाव दिया कि वार्ता के सह-अध्यक्षों को एक ऐसा दस्तावेज तैयार करना चाहिए, जिसमें सुधारों के लक्ष्य, प्रक्रिया के चरण और समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित हो। भारत का मानना है कि इससे बातचीत को दिशा मिलेगी और परिणाम हासिल करने में आसानी होगी।
स्थायी सदस्यता पर नई व्याख्या की जरूरत नहीं
भारत ने स्थायी सदस्यता को लेकर जारी बहस पर भी अपनी राय रखी। हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 23 में स्थायी और अस्थायी सदस्यता की परिभाषा पहले से स्पष्ट रूप से मौजूद है, इसलिए इस विषय पर नई व्याख्या या भ्रम पैदा करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि अफ्रीकी समूह, जी-4 और एल-69 जैसे कई देशों और संगठनों ने भी स्थायी सदस्यता के विस्तार का समर्थन किया है। भारत का मानना है कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने के बजाय ठोस निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधित्व की भी जोरदार वकालत
भारत ने सुरक्षा परिषद में अफ्रीकी देशों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि बड़ी संख्या में सदस्य देशों ने अफ्रीकी प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का समर्थन किया है, लेकिन मौजूदा दस्तावेजों और चर्चाओं में उस समर्थन को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं किया गया।
भारत ने यह भी आपत्ति जताई कि पहले जहां स्थायी सदस्यता के विस्तार के पक्ष में व्यापक समर्थन की बात स्वीकार की जाती थी, अब उसे सीमित देशों का समर्थन बताकर पेश किया जा रहा है, जो वास्तविक स्थिति को सही ढंग से नहीं दर्शाता।
सार्थक और संतुलित सुधारों की मांग दोहराई
भारत ने दोहराया कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक, प्रभावी और संतुलित सुधारों का लगातार समर्थन करता रहेगा। भारत का मानना है कि वैश्विक व्यवस्था में आए बदलावों को देखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना में भी सुधार आवश्यक है, ताकि विकासशील देशों और उभरती शक्तियों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।



