तिरंगे का सम्मान केवल उत्सव नहीं, राष्ट्रीय चेतना का संकल्प भी है

नई दिल्ली: देश का राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के त्याग, संघर्ष, बलिदान और आत्मगौरव का प्रतीक है। इसी भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रारम्भ हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान अब एक सरकारी कार्यक्रम की सीमा से आगे बढ़कर राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों में इस अभियान को 11 से 15 अगस्त तक व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
यह अभियान केवल घरों पर तिरंगा फहराने का नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्यों की पुनर्स्मृति का अवसर भी है। जब युवा, विद्यार्थी, सामाजिक संगठन, पूर्व सैनिक, महिलाएं और आम नागरिक एक साथ तिरंगे के नीचे खड़े होते हैं, तब राष्ट्रीय एकता की भावना स्वतः सशक्त होती है। ऐसे आयोजन लोकतंत्र को केवल चुनावों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाते हैं।
विशेष रूप से इस बार अभियान में तिरंगा यात्रा, शहीद स्मारकों पर स्वच्छता, वीर सैनिकों के परिवारों का सम्मान, विद्यालयों एवं महाविद्यालयों की भागीदारी, तथा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने जैसे कार्यक्रमों को जोड़ा गया है। इससे स्वतंत्रता के संघर्ष और विभाजन की पीड़ा-दोनों ऐतिहासिक अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास दिखाई देता है।

हालाँकि, इस प्रकार के अभियानों की सफलता केवल कार्यक्रमों की संख्या या भीड़ से नहीं मापी जा सकती। यदि तिरंगा केवल फोटो खिंचवाने, सोशल मीडिया पोस्ट करने या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बन जाए, तो उसके मूल उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। राष्ट्रभक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण केवल ध्वज फहराना नहीं, बल्कि संविधान के प्रति निष्ठा, कानून का सम्मान, सामाजिक सौहार्द, स्वच्छता, ईमानदारी और नागरिक दायित्वों का निर्वहन भी है।
यह भी आवश्यक है कि राष्ट्रीय ध्वज किसी दल विशेष की पहचान न बने। तिरंगा पूरे राष्ट्र का है, इसलिए उसके सम्मान का अभियान भी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संचालित होना चाहिए। जब हर विचारधारा, हर वर्ग और हर नागरिक समान भाव से इसमें सहभागी बनेगा, तभी “हर घर तिरंगा” वास्तव में “हर मन तिरंगा” बन सकेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारम्भ इस अभियान ने राष्ट्रीय चेतना को एक नया आयाम दिया है। अब चुनौती यह है कि इस चेतना को केवल पाँच दिनों के आयोजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे वर्षभर नागरिक जीवन का संस्कार बनाया जाए। यदि प्रत्येक भारतीय तिरंगे के सम्मान के साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतना ही सजग हो जाए, तो विकसित भारत-2047 का संकल्प केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उपलब्धि बन सकता है।

तिरंगा हमें केवल स्वतंत्रता की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह भी स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता के साथ उत्तरदायित्व भी जुड़ा है। इसलिए “हर घर तिरंगा” अभियान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब तिरंगा हमारे घरों की छतों के साथ-साथ हमारे विचारों, व्यवहार और राष्ट्रीय चरित्र में भी स्थायी रूप से स्थान प्राप्त करे। तभी यह अभियान एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की एक जीवंत राष्ट्रीय संस्कृति बन सकेगा।





