मनोरंजन

Show: अफवाहों से अलग ‘बिग बॉस’ की हकीकत

घर के अंदर की दुनिया पर से उठा पर्दा

डी.एन. वर्मा

बनिज़े एंटरटेनमेंट का हिस्सा और देश की अग्रणी एंटरटेनमेंट प्रोडक्शन कंपनी ‘एंडेमोल शाइन इंडिया’ लगातार टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ब्लॉकबस्टर स्क्रिप्टेड और नॉन-स्क्रिप्टेड कंटेंट पेश करता रहा है। अपनी विरासत को और मजबूत करते हुए एंडेमोल शाइन इंडिया प्रतिष्ठित रियलिटी शोज़ ‘बिग बॉस’ को एक बार फिर वापस लेकर आया है। बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान एक बार फिर इसके होस्ट के रूप में लौटे हैं। शो के ऐतिहासिक 20वें सीज़न की शुरुआत 6 सितंबर को एक भव्य प्रीमियर के साथ हुई।

कई टेलीविज़न फॉर्मेट शोज़ के विपरीत, जहां नतीजे पहले से तय कहानी के आधार पर या एडिटोरियल विकल्पों के अनुसार सामने आते हैं, ‘बिग बॉस’ की सबसे बड़ी ताकत पूरी तरह से इसके दर्शकों के हाथ में है। दर्शकों की भागीदारी से संचालित इस शो में विजेता का फैसला पूरी तरह से वास्तविक ऑडियंस वोट्स के आधार पर होता है। सोशल मीडिया पर अक्सर निष्पक्षता को लेकर चर्चाएं और बहस देखने को मिलती हैं, लेकिन शो एक सख्त ऑडियंस वोटिंग सिस्टम के तहत चलता है, जो सीधे तौर पर हर एविक्शन और अंत में विजेता का फैसला करता है।

छह भाषाओं में विस्तार हो चुका ‘बिग बॉस’
पिछले दो दशकों में ‘बिग बॉस’ छह भाषाओं में विस्तार कर चुका है। इस दौरान देश के अलग-अलग क्षेत्रों के शीर्ष सितारे शो के होस्ट बने और इसने पूरे देश में एक विशाल फैन फॉलोइंग तैयार की। हालांकि, शो की असली ताकत सिर्फ स्थापित सितारों को मंच देने में नहीं रही है, बल्कि यह सितारे बनाने के लिए भी जाना जाता है। बिग बॉस का घर एक ऐसा मंच है, जहां अनजान चेहरे कदम रखते हैं और बाहर निकलते समय घर-घर में पहचाने जाने वाले नाम बन जाते हैं। शहनाज़ गिल और फरहाना भट्ट जैसे पूर्व कंटेस्टेंट्स बिना किसी बड़े फैन बेस के शो में आए थे, लेकिन उनकी बेबाक और अनफ़िल्टर्ड जर्नी ने उन्हें रातोंरात आइकॉन बना दिया।

यह बदलाव इसलिए संभव है क्योंकि शो बिना किसी स्क्रिप्ट के संचालित होता है। कंटेस्टेंट्स बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए एक सख्त और बेहद दबाव वाले माहौल में प्रवेश करते हैं, जहां न उनके पास फोन होता है और न ही वे अपने करीबियों से संपर्क कर सकते हैं। इस तरह के अलग-थलग और तनावपूर्ण माहौल में कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक अपना असली चेहरा छिपाकर नहीं रख सकता। 24/7 कैमरों की निगरानी में वास्तविक भावनाएं, सच्चे मतभेद और स्वाभाविक दोस्तियां अपने आप सामने आती हैं।

यहां न रीटेक होते हैं न स्क्रिप्ट राइटर्स
पिछले कंटेस्टेंट्स भी अक्सर इस हकीकत की पुष्टि कर चुके हैं। यहां न रीटेक होते हैं, न स्क्रिप्ट राइटर्स होते हैं और न ही आर्टिफिशियल परफॉर्मेंस के लिए कोई गुंजाइश होती है, क्योंकि दांव पर कंटेस्टेंट्स की वास्तविक व्यक्तिगत छवि और प्रतिष्ठा होती है। कोई भी बनावटी अभिनय दर्शकों द्वारा तुरंत पकड़ लिया जाता है। हर रात दर्शकों को जो देखने को मिलता है, वह इंसानी व्यवहार का वास्तविक रूप है— अनस्क्रिप्टेड, अप्रत्याशित और पूरी तरह से घर के अंदर रहने वाले लोगों और घर से बाहर उन्हें देखने वाले दर्शकों द्वारा तय किया गया।

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