स्वास्थ्य

सोते समय क्यों नहीं आती छींक? जानिए इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह और कब बढ़ सकती है परेशानी

नई दिल्ली: छींक आना शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो नाक के भीतर मौजूद धूल, कीटाणु, एलर्जी पैदा करने वाले कण और अन्य बाहरी तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि दिनभर छींक आने के बावजूद सोते समय आमतौर पर छींक क्यों नहीं आती। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका संबंध नींद के दौरान मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली से जुड़ा होता है।

नींद के दौरान क्यों रुक जाती है छींक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जब व्यक्ति सोता है तो मस्तिष्क शरीर की कई रिफ्लेक्स प्रक्रियाओं, जैसे छींक और खांसी, की संवेदनशीलता को कम कर देता है। यही कारण है कि नींद के दौरान नाक में हल्की उत्तेजना होने पर भी छींक आसानी से नहीं आती। यदि उत्तेजना बहुत अधिक हो, तो व्यक्ति जाग सकता है और उसके बाद छींक आ सकती है।

नींद के दो चरणों में बदलता है शरीर का व्यवहार

नींद मुख्य रूप से दो चरणों में होती है— नॉन रैपिड आई मूवमेंट (एनआरईएम) और रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम)।

एनआरईएम नींद में क्या होता है?

एनआरईएम नींद को तीन चरणों में बांटा जाता है। शुरुआती चरण हल्की नींद का होता है, इसके बाद शरीर धीरे-धीरे गहरी नींद में पहुंचता है। इस दौरान हृदय गति और शरीर का तापमान कम होने लगता है। सबसे गहरे चरण में व्यक्ति को जगाना कठिन हो सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि एनआरईएम के दौरान शरीर का रिफ्लेक्स सिस्टम पूरी तरह बंद नहीं होता, लेकिन उसकी संवेदनशीलता काफी कम हो जाती है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में छींक नहीं आती, हालांकि तेज उत्तेजना होने पर व्यक्ति जाग सकता है।

आरईएम नींद में क्यों नहीं आती छींक?

आरईएम नींद वह अवस्था होती है, जिसमें अधिकांश सपने आते हैं। इस दौरान शरीर में ‘मोटर एटोनिया’ नामक स्थिति बनती है, जिसमें मस्तिष्क अधिकांश मांसपेशियों की गतिविधि को अस्थायी रूप से सीमित कर देता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को सपनों के अनुसार शारीरिक गतिविधियां करने से रोकना होता है। इसी वजह से इस चरण में छींक आने की संभावना भी बहुत कम हो जाती है।

रात में छींक आने के क्या हो सकते हैं कारण?

यदि रात के समय बार-बार छींक आती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेटने की स्थिति में नाक की रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह बढ़ने से श्लेष्मा (म्यूकस) अधिक बन सकता है, जिससे छींक की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा धूल, पालतू जानवरों के बाल, फूलों के परागकण या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व भी रात में छींक का कारण बन सकते हैं।

रात में छींक से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

सोने से पहले कमरे की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और आवश्यकता होने पर खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें, ताकि धूल और परागकण अंदर न आएं। सप्ताह में एक या दो बार बेडशीट बदलें। यदि पालतू जानवरों से एलर्जी है, तो उन्हें बिस्तर से दूर रखें। नियमित रूप से कमरे की सफाई करें और सोने से पहले स्नान करना भी शरीर को साफ रखने में मददगार हो सकता है।

यदि लगातार छींक, नाक बंद रहना या एलर्जी की समस्या बनी रहती है, तो स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहेगा।

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