मध्य प्रदेशराज्य

एमपी के आदिवासी गांवों में रहस्यमयी बीमारी का कहर, 7 बच्चों की मौत; बुखार-चकत्ते के साथ किडनी पर असर

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में एक अज्ञात बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इस बीमारी से अब तक कम से कम सात बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रभावित बच्चों में तेज बुखार, शरीर पर चकत्ते, खून की कमी, शरीर में पानी की कमी और किडनी से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। बीमारी के कारण का पता लगाने के लिए मरीजों के नमूने जांच के लिए पुणे की प्रयोगशाला भेजे गए हैं। विशेषज्ञों की टीम भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कई आदिवासी गांवों में बीमारी के मामले

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बालाघाट के बिरसा विकासखंड के अडोरी, मच्छुरदा पंचायत, बोंदारी और कुंडेकसा सहित कई गांवों में बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं। सोमवार रात जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तीन साल की एक बच्ची की मौत के बाद मृतकों की संख्या सात तक पहुंच गई।

अधिकारियों के मुताबिक मृत बच्ची की पहचान स्थानीय निवासी सुखचंद धुर्वे की बेटी प्रियंका के रूप में हुई है। उसे 9 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन उसकी मौत हो गई। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बच्ची की मौत की पुष्टि की है। उनके अनुसार, बच्ची कई बीमारियों से पीड़ित थी।

26 जून से 6 अगस्त के बीच छह बच्चों की मौत

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपल्लव ने बताया कि 26 जून से 6 अगस्त के बीच बोंदारी और कुंडेकसा गांवों में छह बच्चों की मौत हुई। इनमें लमानिन धुर्वे, साहिल धुर्वे, पूजा धुर्वे, सचिन मरकाम, प्रीति मरकाम और अरविंद धुर्वे शामिल हैं।

इसके अलावा सोमवार को एक और बच्चे की बीमारी से मौत होने की सूचना सामने आई है, हालांकि अधिकारियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।

बच्चों में दिख रहे हैं कई गंभीर लक्षण

जबलपुर मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवींद्र विष्णोई, बाल रोग विशेषज्ञों और स्थानीय चिकित्सा दल ने प्रभावित बच्चों की जांच की है। फिलहाल बीमारी के सटीक कारण की पहचान नहीं हो सकी है।

अधिकारियों के मुताबिक, बीमार बच्चों में खून की कमी, शरीर में पानी की कमी, किडनी की समस्या, सर्दी, तेज बुखार, एक्जिमा और फंगल संक्रमण जैसे लक्षण पाए जा रहे हैं। बच्चों के शरीर पर रहस्यमयी चकत्ते भी उभर रहे हैं।

पुणे भेजे गए नमूने, दिल्ली एम्स की टीम भी पहुंचेगी

बीमारी के कारण का पता लगाने के लिए मरीजों के नमूने पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली एम्स की एक टीम भी बालाघाट पहुंच रही है।

इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रभावित गांवों में तत्काल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

दिग्विजय सिंह ने 11 बच्चों की मौत का दावा किया

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि बालाघाट के बिरसा आदिवासी विकासखंड में पिछले एक सप्ताह के दौरान दूषित पानी और संक्रामक बीमारियों के कारण 11 बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक 100 से अधिक बच्चों को बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इनमें 40 से 50 बच्चे गंभीर स्थिति में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कम से कम सात बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है।

बच्चों का वार्ड मरीजों से भरा होने का दावा

दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उइके के हवाले से कहा है कि बालाघाट जिला अस्पताल का बच्चों का वार्ड मरीजों से भर गया है। उनके पत्र में बोंदारी गांव के मजदूर समरू धुर्वे के दो बच्चों की मौत का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा पांच अन्य बच्चों की तेज बुखार से मौत होने का दावा किया गया है।

प्रभावित परिवारों को 10 लाख रुपये की मदद की मांग

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव को चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा करने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाने और प्रत्येक पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

उन्होंने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एयर एम्बुलेंस के जरिए नागपुर, रायपुर या भोपाल ले जाने और उनके इलाज का खर्च सरकार की ओर से उठाए जाने की मांग भी की है।

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