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दिल की सेहत के लिए कौन सा तेल बेहतर? रिफाइंड की जगह इन 5 विकल्पों को डाइट में शामिल करने की सलाह

स्वास्थ्य डेस्क: खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हमारी रोज की डाइट का अहम हिस्सा है। ऐसे में तेल का चुनाव सेहत पर असर डाल सकता है। प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा ने रिफाइंड तेल की जगह कुछ दूसरे विकल्पों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले तेल का चुनाव करते समय उसके वसा और पोषक तत्वों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने घी, घर का बना मक्खन, सरसों का तेल, जैतून का तेल और तिल के तेल को विकल्प के तौर पर बताया है।

घी को बताया अच्छा विकल्प

घी भारतीय रसोई में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। इसमें वसा में घुलने वाले विटामिन ए, डी, ई और के पाए जाते हैं। इसमें ब्यूटिरेट नामक शॉर्ट-चेन फैटी एसिड भी मौजूद होता है, जिसे आंतों और पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। डॉ. चोपड़ा के अनुसार, घी का इस्तेमाल खाना पकाने में किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी वसा की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।

घर का बना मक्खन भी हो सकता है विकल्प

मक्खन का इस्तेमाल आमतौर पर ब्रेड या दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ किया जाता है, लेकिन इसे खाना पकाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार, डॉक्टर ने घर पर तैयार किए गए मक्खन को रिफाइंड तेल की तुलना में बेहतर विकल्प बताया है। साथ ही बाजार में मिलने वाले मक्खन के बजाय घर में तैयार मक्खन को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

सरसों के तेल में पाए जाते हैं अच्छे वसा

सरसों का तेल भारतीय खान-पान का पुराना हिस्सा रहा है। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड यानी एएलए और कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी मौजूद होते हैं। इसी वजह से इसे संतुलित मात्रा में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

जैतून का तेल भी माना जाता है अच्छा विकल्प

जैतून के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड वसा और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इन पोषक तत्वों को हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। यह शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और खराब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। अगर उपलब्ध हो तो खाना पकाने और भोजन में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

तिल का तेल भी डाइट में कर सकते हैं शामिल

तिल का तेल भी भारतीय खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल होता आया है। इसमें असंतृप्त वसा के साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद असंतृप्त वसा को हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है। तिल के तेल से भोजन का स्वाद भी बढ़ता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

एवोकाडो तेल भी एक विकल्प

डॉ. चोपड़ा ने इन विकल्पों के अलावा एवोकाडो तेल को भी इस्तेमाल करने की बात कही है। हालांकि, इसकी कीमत अन्य तेलों की तुलना में अधिक हो सकती है। किसी भी तेल या वसा को चुनते समय केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरे आहार की गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

तेल चुनते समय मात्रा का रखें ध्यान

किसी भी तेल को पूरी तरह से स्वास्थ्य के लिए अच्छा या खराब मानना सही नहीं है। तेल में कैलोरी और वसा की मात्रा अधिक होती है, इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन महत्वपूर्ण है। हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार आहार संबंधी सलाह के लिए चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

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