
नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारत ढहने की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में पेइंग गेस्ट आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कहा कि प्रस्तावित नीति के तहत पुरानी इमारतों के मालिकों के लिए संरचनात्मक जांच रिपोर्ट और सुरक्षा प्रमाण पत्र देना अनिवार्य किया जाएगा। इन दस्तावेजों के बाद ही ऐसी इमारतों को पीजी आवास, नर्सिंग होम, स्कूल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने की व्यवस्था की जाएगी।
हादसे के बाद राजधानी में पुराने भवनों की मजबूती और उनमें संचालित व्यावसायिक गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। सरकार की प्रस्तावित नीति में खास तौर पर पुरानी इमारतों की संरचनात्मक मजबूती की नियमित जांच और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षा पर फोकस
सत्य निकेतन में पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारत के ढहने के बाद सरकार ने पुराने भवनों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यावसायिक उपयोग में आने वाली पुरानी इमारतें निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरी उतरें और उनकी संरचनात्मक स्थिति की समय-समय पर जांच हो।
1993 से चल रही पीजी को नियंत्रित करने की कवायद
दिल्ली में पीजी आवासों को नियमन के दायरे में लाने की कोशिश नई नहीं है। राजधानी में पीजी आवासों के नियमन की प्रक्रिया वर्ष 1993 से चल रही है, लेकिन तीन दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद इसे व्यापक स्तर पर लागू नहीं किया जा सका है। अब नई नीति के जरिए सरकार पीजी समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा रही पुरानी इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



