स्वास्थ्य

ब्रेन एजिंग को धीमा करने में मदद कर सकता है संगीत, उम्र बढ़ने पर भी दिमाग को सक्रिय रखने का असरदार तरीका

नई दिल्ली: उम्र बढ़ना जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसके साथ शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क में भी कई बदलाव आने लगते हैं। बढ़ती उम्र में चीजें याद रखने में परेशानी, किसी व्यक्ति का नाम तुरंत याद न आना या एक साथ कई काम करने में पहले जैसी आसानी महसूस न होना आम हो सकता है। सोचने, समझने और जानकारी को संसाधित करने की गति भी समय के साथ प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उम्र बढ़ने के साथ दिमागी क्षमता में गिरावट को पूरी तरह स्वीकार कर लिया जाए। विशेषज्ञों और अध्ययनों के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली के साथ कुछ मानसिक गतिविधियां दिमाग को लंबे समय तक सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। इनमें संगीत सीखना और किसी वाद्य यंत्र को बजाने का अभ्यास खास तौर पर उपयोगी माना जा रहा है।

उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क में धीरे-धीरे संरचनात्मक बदलाव होते हैं। कई लोगों में न्यूरॉन्स के बीच नए कनेक्शन बनाने और सूचनाओं को तेजी से संसाधित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र के बाद मस्तिष्क में होने वाले कुछ बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ब्रेन एट्रोफी या ब्रेन श्रिंकेज कहा जाता है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। जीवनशैली, शिक्षा, तनाव का स्तर, सामाजिक सक्रियता और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे कई कारक दिमाग पर उम्र के प्रभाव को प्रभावित कर सकते हैं।

अच्छी जीवनशैली के साथ मानसिक सक्रियता भी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र से ही खानपान और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और मानसिक रूप से सक्रिय रहने की आदत ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसके साथ ही संगीत से जुड़ी गतिविधियां भी दिमाग के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। किसी वाद्य यंत्र को सीखते समय मस्तिष्क के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, इसलिए इसे एक तरह की फुल ब्रेन वर्कआउट गतिविधि माना जाता है।

जब कोई व्यक्ति पियानो, गिटार, तबला, वायलिन या कोई अन्य वाद्य यंत्र बजाना सीखता है तो हाथों और अंगुलियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला मोटर कॉर्टेक्स सक्रिय होता है। वहीं स्वर और ताल को पहचानने के लिए ऑडिटरी सिस्टम काम करता है। इसके साथ याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्सों को भी लगातार सक्रिय रहना पड़ता है। संगीत से जुड़ी गतिविधियों के दौरान भावनात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मकता भी मस्तिष्क की सक्रियता का हिस्सा बनती है। यही वजह है कि संगीत प्रशिक्षण को मानसिक लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है।

नई चीजें सीखना दिमाग के लिए हो सकता है फायदेमंद

अध्ययनों के अनुसार, उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क में नई तंत्रिका कड़ियां बनाने की क्षमता बनी रह सकती है। ऐसे में लगातार नई चीजें सीखना और दिमाग को चुनौती देने वाली गतिविधियों में शामिल होना उपयोगी हो सकता है। संगीत सीखना इस दिशा में एक दिलचस्प विकल्प है, क्योंकि इसमें सुनना, समझना, याद रखना, हाथों की गतिविधियों को नियंत्रित करना और भावनात्मक रूप से जुड़ना एक साथ शामिल होता है।

उम्र के साथ स्मृति और ध्यान में भी हो सकते हैं बदलाव

बढ़ती उम्र के साथ दिमाग की कोशिकाओं के बीच संचार की गति धीमी पड़ सकती है। स्मृति, ध्यान और निर्णय क्षमता से जुड़े हिस्सों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ अध्ययनों में उम्र के साथ ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर में कमी की बात सामने आई है। इसके बावजूद स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक सक्रियता इन बदलावों की गति को प्रभावित कर सकती है।

महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव भी स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए भी संगीत, योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव जैसी गतिविधियां ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती हैं।

बढ़ती उम्र को दिमागी कमजोरी का अंतिम संकेत मानने की जरूरत नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान, मानसिक व्यायाम और संगीत जैसी नई चीजें सीखने की आदत दिमाग को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। उम्र चाहे जो भी हो, दिमाग को चुनौती देना और लगातार कुछ नया सीखते रहना मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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