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BRICS सम्मेलन से पहले कांग्रेस ने याद किया इतिहास, जयराम रमेश बोले- मनमोहन सिंह ने रखी थी विकास बैंक की नींव

नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले कांग्रेस ने इस समूह के गठन और उसके विस्तार के इतिहास को सामने रखा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत ने पहली बार वर्ष 2012 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसी दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स विकास बैंक बनाने का विचार रखा था, जो बाद में न्यू डेवलपमेंट बैंक के रूप में अस्तित्व में आया।

जयराम रमेश ने कहा कि मुख्य रूप से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पहल पर सितंबर 2006 में समूह के चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में मुलाकात की थी। इस बैठक में आपसी संपर्क और सहयोग के विभिन्न माध्यम विकसित करने का निर्णय लिया गया था।

2009 में हुआ पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन

रमेश के अनुसार, पहला ‘ब्रिक शिखर सम्मेलन’ जून 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित हुआ था। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हिस्सा लिया था। सितंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद ब्रिक का नाम ब्रिक्स हो गया।

इसके बाद वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। एक साल बाद इंडोनेशिया भी इस समूह में शामिल हुआ। समूह की अध्यक्षता हर साल बदलती है।

2012 में भारत ने पहली बार की मेजबानी

कांग्रेस नेता ने बताया कि भारत ने पहली बार 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसी बैठक में डॉ. मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स विकास बैंक स्थापित करने का विचार सामने रखा था।

जयराम रमेश के मुताबिक, जुलाई 2014 में यह संस्था अस्तित्व में आई और इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में बनाया गया। इसे न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी एनडीबी नाम दिया गया। जाने-माने बैंकर के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने थे।

उन्होंने कहा कि इसके बाद भारत ने देश के विभिन्न राज्यों में विकास परियोजनाओं के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक से करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण लिया है।

वैश्विक संकट के बीच हो रहा ब्रिक्स सम्मेलन

जयराम रमेश की यह टिप्पणी भारत की मेजबानी में शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आई है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी तथा ट्रंप प्रशासन की व्यापार और शुल्क नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।

कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद

नई दिल्ली में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

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