
जयपुर: राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 41 प्रतिशत वार्डों पर जीत दर्ज की है। भाजपा ने कुल 10,244 वार्डों में से 4,179 वार्ड अपने नाम किए, जबकि कांग्रेस 3,613 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही। पिछले निकाय चुनावों की तुलना में भाजपा की हिस्सेदारी करीब 5 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि कांग्रेस के हिस्से में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि, इस बार परिसीमन के चलते वार्डों की संख्या में बड़ा बदलाव हुआ है, इसलिए पिछले चुनाव से सीधे सीटों की तुलना करना आसान नहीं है।
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव तीन स्तरों पर हुए हैं। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका या नगर पंचायत शामिल हैं। नगर निगम बड़े शहरों का प्रशासन संभालते हैं, जबकि नगर परिषद और पालिकाएं कस्बों की व्यवस्था देखती हैं। इस चुनाव में 40 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं की भी बड़ी हिस्सेदारी रही। 14 सितंबर की शाम 7 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 10,244 में से 10 वार्डों के नतीजे आना बाकी थे। भाजपा ने कांग्रेस पर 566 वार्डों की बढ़त बनाई, जबकि निर्दलीयों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की।
परिसीमन के बाद 2,770 नए वार्ड जुड़े
साल 2019 से 2021 के बीच चार चरणों में हुए पिछले निकाय चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी दायरा काफी बढ़ा है। परिसीमन की प्रक्रिया के बाद राजस्थान में 2,770 नए वार्ड जोड़े गए। इससे कुल वार्डों की संख्या में 37.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले चुनाव चक्र में करीब 7,474 वार्ड थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर लगभग 10,244 हो गई।
भाजपा की सीटों में 56.8 प्रतिशत का उछाल
पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस ने करीब 3,042 वार्ड जीते थे, जबकि भाजपा के खाते में 2,666 और निर्दलीयों के खाते में 1,672 वार्ड आए थे। ताजा परिणामों में भाजपा की सीटें बढ़कर 4,179 हो गईं। यह पिछले आंकड़े के मुकाबले 56.8 प्रतिशत की वृद्धि है।
कांग्रेस की सीटों की संख्या भी बढ़ी है और वह 3,042 से बढ़कर 3,613 वार्ड तक पहुंची है। हालांकि, उसकी वृद्धि दर 18.7 प्रतिशत रही। वहीं, निर्दलीयों की संख्या 1,672 से बढ़कर 2,273 हो गई, जो 35.9 प्रतिशत की वृद्धि है।
RLP और माकपा के प्रदर्शन में भी बड़ा सुधार
ताजा आंकड़ों में भाजपा 4,179 वार्ड यानी 40.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। कांग्रेस ने 3,613 वार्ड यानी 35.3 प्रतिशत पर जीत दर्ज कर दूसरा स्थान हासिल किया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी, माकपा और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी समेत कई दलों ने भी अपने प्रदर्शन में सुधार किया है।
क्षेत्रीय दलों के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी 14 वार्ड से बढ़कर 63 वार्ड तक पहुंच गई। यह 350 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि है। RLP का प्रभाव मुख्य रूप से जाट बहुल पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में माना जाता है।
माकपा भी 8 से बढ़कर 38 वार्डों तक पहुंची, यानी उसके प्रदर्शन में 375 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। इसके उलट बहुजन समाज पार्टी के वार्ड 24 से घटकर 19 रह गए, जो 20.8 प्रतिशत की गिरावट है।
कांग्रेस की हिस्सेदारी 40.7 से घटकर 35.3 प्रतिशत हुई
कुल वार्डों में हिस्सेदारी के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के बीच अंतर और स्पष्ट हो जाता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास कुल वार्डों की 40.7 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो इस बार घटकर 35.3 प्रतिशत रह गई। यानी उसे करीब 5.4 प्रतिशत अंकों का नुकसान हुआ।
भाजपा की हिस्सेदारी 35.7 प्रतिशत से बढ़कर 40.8 प्रतिशत हो गई। इस तरह उसकी हिस्सेदारी में 5.1 प्रतिशत अंकों का इजाफा हुआ। निर्दलीयों की हिस्सेदारी भी 22.4 प्रतिशत से मामूली घटकर 22.2 प्रतिशत रह गई।
भाजपा की बढ़त को केवल नए वार्ड बनने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। राज्य में कुल वार्डों की संख्या 37.1 प्रतिशत बढ़ी, जबकि भाजपा की सीटों में 56.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, कांग्रेस की सीटों में केवल 18.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो वार्डों के विस्तार की दर से करीब आधी है। यही वजह है कि कुल सीटें बढ़ने के बावजूद वार्डों की हिस्सेदारी में कांग्रेस पिछड़ गई।
भजनलाल सरकार के लिए राजनीतिक रूप से अहम नतीजे
दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सत्ता में आई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के लिए निकाय चुनाव के ये परिणाम राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अधिकांश राज्यों की तरह राजस्थान में भी सत्ताधारी दल को प्रशासनिक तंत्र, संगठन और राज्य स्तर पर विकास कार्यों के प्रचार का स्वाभाविक लाभ मिलता है।
हालांकि, निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ उम्मीदवारों का चयन, आरक्षण, पार्टी के भीतर गुटबाजी और निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रभाव भी नतीजों को प्रभावित करता है।
‘स्विंग स्टेट’ राजस्थान में बदली चुनावी तस्वीर
विधानसभा चुनावों के स्तर पर राजस्थान को पारंपरिक रूप से ‘स्विंग स्टेट’ माना जाता है। पिछले निकाय चुनाव के दौरान राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इस बार तस्वीर बदल गई है और सत्ता में मौजूद भाजपा ने बढ़त हासिल कर ली है।
हालांकि, 3,613 वार्डों में जीत के साथ कांग्रेस ने यह भी दिखाया है कि राज्य में उसका जमीनी संगठन पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
शहरी इलाकों में भाजपा ने मजबूत किया आधार
राजस्थान के शहरी इलाकों को लंबे समय से भाजपा का मजबूत आधार माना जाता रहा है। केंद्र सरकार के यूजीसी इक्विटी विनियमों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सक्रियता के बीच इन चुनावों को भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण परीक्षा माना जा रहा था।
इन राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद भाजपा ने अपने शहरी आधार को कायम रखते हुए निकाय चुनाव में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।



