उत्तर प्रदेशराज्य

100 बीघा फसल बर्बाद, कर्ज वसूली का दबाव भी बढ़ा; महोबा में किसान ने फांसी लगाकर दी जान

महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के खरेला क्षेत्र में अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने और कर्ज वसूली के लिए कथित तौर पर सूदखोरों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान ने गुरुवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान खरेला के हले तृतीय मोहाल निवासी 52 वर्षीय हरगोविंद प्रजापति के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे।

5 बीघा जमीन थी अपनी, करीब 100 बीघा पर करते थे खेती

पुलिस उपाधीक्षक दीपक दुबे ने बताया कि हरगोविंद के पास अपनी करीब 5 बीघा कृषि भूमि थी। इसके अलावा वह दूसरों की लगभग 100 बीघा जमीन बटाई पर लेकर खेती करते थे। पिछले करीब चार वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं के कारण उन्हें खेती में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।

खेती में हुए नुकसान के बीच हरगोविंद ने सूदखोरों से भी रकम उधार ली थी। इस बार अतिवृष्टि के कारण फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। फसल के नुकसान से वह गहरे सदमे में थे और कर्ज का दबाव भी बना हुआ था।

खेत जाने की बात कहकर निकले थे, पेड़ से लटके मिले

पुलिस के मुताबिक, गुरुवार सुबह हरगोविंद खेतों की ओर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। काफी समय बीतने के बाद जब वह वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उन्हें खेत की मेड़ पर स्थित एक पेड़ से फंदे पर लटका पाया गया।

घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

बेटों ने लगाया सूदखोरों की प्रताड़ना का आरोप

हरगोविंद के बेटों बाबूराम और दिलीप कुमार ने पुलिस को दिए बयान में फसल बर्बाद होने और सूदखोरों की कथित प्रताड़ना को उनके पिता की मौत की वजह बताया है। परिजनों के अनुसार, कर्ज चुकाने के लिए सूदखोर उन्हें लगातार परेशान कर रहे थे और अक्सर रास्ते में रोककर अपमानित करते थे।

परिजनों की ओर से लगाए गए इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

चार साल से प्राकृतिक आपदाओं ने बढ़ाई थी मुश्किल

परिजनों और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, हरगोविंद पिछले करीब चार वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेती में नुकसान झेल रहे थे। इस बार अतिवृष्टि से फसल पूरी तरह खराब होने के बाद उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई थीं। खेती के लिए लिए गए कर्ज की अदायगी का दबाव भी बना हुआ था।

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